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भारत की जलवायु योजना और नए बाघ अभयारण्य 2026

भारत ने राष्ट्रीय जलवायु सुदृढ़ता कार्य योजना 2030 का अनावरण किया
2026-05-08
पृष्ठभूमि: भारत जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, जिसके लिए मजबूत अनुकूलन और शमन रणनीतियों की आवश्यकता है। विभिन्न क्षेत्रों में जलवायु कार्रवाई को एकीकृत करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचे की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। वर्तमान संदर्भ: 7 मई, 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 'राष्ट्रीय जलवायु सुदृढ़ता कार्य योजना 2030' का अनावरण किया। यह योजना कृषि, जल और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जलवायु अनुकूलन को एकीकृत करती है, जिसमें विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। यह सामुदायिक भागीदारी और तकनीकी समाधानों पर जोर देती है। प्रभाव: यह एकीकृत दृष्टिकोण भारत की जलवायु झटकों का सामना करने की क्षमता को बढ़ाएगा, खाद्य और जल सुरक्षा में सुधार करेगा और कमजोर समुदायों की रक्षा करेगा। यह जलवायु परियोजनाओं के लिए धन को सुव्यवस्थित करेगा और भारत की वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं को मजबूत करेगा।
एनटीसीए ने भारत में दो नए बाघ अभयारण्यों की घोषणा की
2026-05-08
पृष्ठभूमि: 1973 में शुरू किया गया प्रोजेक्ट टाइगर भारत की बाघ आबादी और उनके आवासों के संरक्षण में महत्वपूर्ण रहा है। निरंतर प्रयासों से बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे आगे आवास विस्तार और सुरक्षा की आवश्यकता महसूस हुई। वर्तमान संदर्भ: नवीनतम राष्ट्रीय बाघ जनगणना के बाद, जिसमें बाघों की स्थिर और बढ़ती आबादी का संकेत मिला, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने 6 मई, 2026 को दो नए बाघ अभयारण्यों की स्थापना की घोषणा की। ये अभयारण्य मध्य और पूर्वोत्तर भारत में स्थित हैं, जिनका उद्देश्य बड़े सन्निहित आवास बनाना और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है। प्रभाव: यह विस्तार भारत की बाघ संरक्षण सफलता को मजबूत करेगा, वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों में योगदान देगा। यह पर्यावरण-पर्यटन को भी बढ़ावा देगा, स्थानीय आजीविका उत्पन्न करेगा और महत्वपूर्ण वन पारिस्थितिकी तंत्रों के दीर्घकालिक पारिस्थितिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करेगा।
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