2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लिए भारत का जोर
2026-05-01पृष्ठभूमि: भारत ने COP26 शिखर सम्मेलन में 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का संकल्प लिया है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए देश के ऊर्जा क्षेत्र और औद्योगिक प्रथाओं में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन की आवश्यकता है।
वर्तमान संदर्भ: सरकार सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है, साथ ही भविष्य के ईंधन के रूप में हरित हाइड्रोजन की खोज भी कर रही है। उद्योगों को स्वच्छ प्रौद्योगिकियों को अपनाने और ऊर्जा दक्षता में सुधार के लिए प्रोत्साहित करने हेतु नीतियां तैयार की जा रही हैं।
प्रभाव: यह परिवर्तन जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। यह हरित क्षेत्रों में तकनीकी नवाचार और रोजगार सृजन के अवसर भी प्रस्तुत करता है।
राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना प्रजातियों की रिकवरी पर केंद्रित
2026-05-01पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (NWAP) भारत की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण के लिए एक व्यापक रणनीति है। यह आवास संरक्षण, प्रजाति प्रबंधन और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपायों की रूपरेखा तैयार करती है।
वर्तमान संदर्भ: NWAP के नवीनतम संस्करण में बाघों, हाथियों और गैंडों सहित गंभीर रूप से लुप्तप्राय जानवरों के लिए प्रजाति रिकवरी कार्यक्रमों पर जोर दिया गया है। यह संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन को मजबूत करने और संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों को शामिल करने पर भी केंद्रित है।
प्रभाव: इस नवीनीकृत फोकस का उद्देश्य संकटग्रस्त प्रजातियों की आबादी की स्थिति में काफी सुधार करना, उनके आवासों का संरक्षण करना और भारत के प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र के दीर्घकालिक पारिस्थितिक संतुलन को सुनिश्चित करना है।
एकल-उपयोग प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने की पहल
2026-05-01पृष्ठभूमि: भारत प्लास्टिक प्रदूषण, विशेष रूप से एकल-उपयोग प्लास्टिक (SUPs) के उपयोग को कम करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है, जो पर्यावरण और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा करते हैं।
वर्तमान संदर्भ: सरकार ने कुछ SUP वस्तुओं पर प्रतिबंध लागू किए हैं और विकल्पों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। प्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों के बारे में नागरिकों को शिक्षित करने और जिम्मेदार निपटान और रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
प्रभाव: इन उपायों से लैंडफिल और जल निकायों में प्रवेश करने वाले प्लास्टिक कचरे की मात्रा में काफी कमी आने की उम्मीद है, जिससे वन्यजीवों की रक्षा होगी, मिट्टी और पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा, और एक स्वच्छ पर्यावरण में योगदान मिलेगा।