गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में चीतों का सफल प्रजनन
2026-04-27पृष्ठभूमि: 2022 में शुरू किए गए 'प्रोजेक्ट चीता' का उद्देश्य भारत में इस प्रजाति को पुनर्जीवित करना था। कूनो नेशनल पार्क में घनत्व की समस्याओं को कम करने के लिए मध्य प्रदेश के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को दूसरे घर के रूप में विकसित किया गया था। वर्तमान संदर्भ: 27 अप्रैल 2026 को, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने गांधी सागर में तीन चीता शावकों के जन्म की पुष्टि की, जो दूसरे पुनर्वास स्थल के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। प्रभाव: यह सफलता बहु-स्थल रणनीति की पुष्टि करती है, जो दीर्घकालिक आनुवंशिक विविधता सुनिश्चित करती है और स्थानीय विलुप्ति के जोखिम को कम करती है, साथ ही मालवा क्षेत्र में पर्यावरण-पर्यटन और संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देती है।
राष्ट्रीय ब्लू कार्बन इन्वेंटरी 2026 का विमोचन
2026-04-27पृष्ठभूमि: मैंग्रोव और समुद्री घास जैसे 'ब्लू कार्बन' पारिस्थितिकी तंत्र स्थलीय वनों की तुलना में दस गुना अधिक कार्बन सोखते हैं। भारत अपने 'नेट जीरो' लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इस क्षमता को मापने पर काम कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 26 अप्रैल 2026 को 'राष्ट्रीय ब्लू कार्बन इन्वेंटरी 2026' जारी की, जिसमें भारतीय तटरेखा के साथ 5,000 वर्ग किमी के उच्च-क्षमता वाले कार्बन सोखने वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है। प्रभाव: यह इन्वेंटरी भारत के कार्बन क्रेडिट बाजार के लिए एक वैज्ञानिक आधार प्रदान करती है और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ तटीय लचीलेपन को मजबूत करती है। यह 'मिष्टी' (MISHTI) योजना के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो तटीय बहाली परियोजनाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय जलवायु वित्त को सुगम बनाती है।