Current Affairs & MCQs
Latest Questions, Daily Updates & More

भारत की नई पर्यावरण पहलें: सुंदरबन और शहरी हरियाली

सुंदरबन मैंग्रोव लचीलापन पहल का शुभारंभ
2026-04-26
पृष्ठभूमि: सुंदरबन, एक महत्वपूर्ण यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, जलवायु परिवर्तन, बढ़ते समुद्री स्तर और मानवीय अतिक्रमण से गंभीर खतरों का सामना कर रहा है, जिससे मैंग्रोव का क्षरण हो रहा है। ये अद्वितीय पारिस्थितिकी तंत्र जैव विविधता, तटीय सुरक्षा और स्थानीय आजीविका के लिए महत्वपूर्ण हैं। पिछली संरक्षण पहलों के मिश्रित परिणाम रहे हैं, जिससे इन जटिल चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करने के लिए एक अधिक एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता है। वर्तमान संदर्भ: 24 अप्रैल, 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने "सुंदरबन मैंग्रोव लचीलापन पहल (SMRI)" का शुभारंभ किया। यह पांच वर्षीय परियोजना बड़े पैमाने पर मैंग्रोव वनीकरण, degraded क्षेत्रों की बहाली और स्थायी आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। यह निगरानी और अनुकूली प्रबंधन रणनीतियों के लिए उन्नत रिमोट सेंसिंग प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करती है। प्रभाव: SMRI से सुंदरबन की पारिस्थितिक लचीलापन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे चरम मौसमी घटनाओं के खिलाफ इसकी प्राकृतिक रक्षा मजबूत होगी। यह जैव विविधता में सुधार करेगा, कार्बन को sequester करेगा और क्षेत्र के निवासियों के लिए स्थायी आर्थिक अवसर प्रदान करेगा। यह पहल एकीकृत तटीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के लिए एक राष्ट्रीय मानक स्थापित करती है।
शहरी हरित स्थानों और जैव विविधता संरक्षण पर राष्ट्रीय नीति
2026-04-26
पृष्ठभूमि: भारत के तीव्र शहरीकरण के कारण शहरी हरित स्थानों में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे वायु प्रदूषण, जैव विविधता का नुकसान और शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव बढ़ रहा है। शहरी हरियाली के लिए एक सुसंगत राष्ट्रीय ढांचे की कमी ने प्रभावी योजना और कार्यान्वयन में बाधा डाली है, जिससे शहर के निवासियों के जीवन की गुणवत्ता और पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित हुआ है। वर्तमान संदर्भ: 25 अप्रैल, 2026 को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से, "शहरी हरित स्थानों और जैव विविधता संरक्षण पर राष्ट्रीय नीति" का शुभारंभ किया। यह ऐतिहासिक नीति शहरी विकास योजनाओं में विशिष्ट हरित आवरण प्रतिशत को अनिवार्य करती है, देशी पौधों की प्रजातियों को बढ़ावा देती है, और शहर की सीमाओं के भीतर शहरी वन, आर्द्रभूमि और जैव विविधता पार्क बनाने को प्रोत्साहित करती है। प्रभाव: यह नीति शहरी परिदृश्य को बदलने, वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार करने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और शहरी जैव विविधता को बढ़ाने के लिए तैयार है। यह स्वस्थ, अधिक रहने योग्य शहरों को बढ़ावा देगी, जो भारत के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है। सफल कार्यान्वयन के लिए केंद्र, राज्य और स्थानीय शहरी निकायों के बीच मजबूत समन्वय के साथ-साथ जनभागीदारी की आवश्यकता है।
Home Exams Jobs Current Affairs Mock Tests