राष्ट्रीय मैंग्रोव लचीलापन पहल का शुभारंभ
2026-04-25पृष्ठभूमि: मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र महत्वपूर्ण तटीय अवरोधक हैं, जो तटरेखाओं को कटाव, तूफान और सुनामी से बचाते हैं। ये समुद्री जीवन के लिए नर्सरी और महत्वपूर्ण कार्बन सिंक के रूप में भी कार्य करते हैं। भारत का व्यापक मैंग्रोव आवरण जलवायु परिवर्तन और तटीय विकास से खतरे में है।
वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने "राष्ट्रीय मैंग्रोव लचीलापन पहल (NMRI) 2026" का शुभारंभ किया है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य नौ तटीय राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में 5,000 हेक्टेयर से अधिक degraded मैंग्रोव वनों को बहाल और संरक्षित करना है, जिसमें उपग्रह निगरानी को सामुदायिक-नेतृत्व वाले संरक्षण के साथ एकीकृत किया गया है।
प्रभाव: NMRI extreme मौसम की घटनाओं और समुद्र-स्तर में वृद्धि के खिलाफ भारत की तटीय लचीलापन को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा। यह जैव विविधता को बढ़ावा देगा, मछली स्टॉक में सुधार करेगा और वायुमंडलीय कार्बन की पर्याप्त मात्रा को sequester करेगा। यह पहल स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका को भी बढ़ावा देती है, जो भारत की जलवायु और जैव विविधता प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने की दर में तेजी
2026-04-25पृष्ठभूमि: हिमालयी क्षेत्र, जिसे अक्सर "तीसरा ध्रुव" कहा जाता है, अरबों लोगों के लिए ताजे पानी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, और इसके ग्लेशियर ग्लोबल वार्मिंग के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। हाल के दशकों में ग्लेशियरों के तेजी से पीछे हटने की alarming प्रवृत्ति देखी गई है, जो क्षेत्रीय जल सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित कर रही है।
वर्तमान संदर्भ: वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान निकायों की एक हालिया सहयोगी रिपोर्ट से पता चला है कि पिछले पांच वर्षों में कई प्रमुख हिमालयी ग्लेशियरों के पिघलने की दर में अभूतपूर्व तेजी आई है। अध्ययन इस घटना का कारण बढ़ते क्षेत्रीय तापमान और मानवजनित स्रोतों से ब्लैक कार्बन के बढ़ते जमाव को बताता है।
प्रभाव: यह त्वरित पिघलाव downstream आबादी के लिए जल सुरक्षा के लिए गंभीर दीर्घकालिक खतरा पैदा करता है, जिससे अल्पकालिक में ग्लेशियर झील outburst बाढ़ (GLOFs) का जोखिम बढ़ जाता है और भविष्य में संभावित जल संकट हो सकता है। यह क्षेत्र भर में मजबूत जलवायु शमन और अनुकूलन रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता पर जोर देता है।