Current Affairs & MCQs
Latest Questions, Daily Updates & More

पर्यावरण और पारिस्थितिकी समाचार: जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, संरक्षण

जलवायु परिवर्तन से भारत के प्रवाल भित्तियों को बढ़ता खतरा
2026-04-24
पृष्ठभूमि: प्रवाल भित्तियाँ महत्वपूर्ण समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र हैं, जो अपार जैव विविधता का समर्थन करती हैं और तटीय सुरक्षा प्रदान करती हैं। वे समुद्री तापमान और रसायन शास्त्र में परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। वर्तमान संदर्भ: हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि और महासागर का अम्लीकरण भारत की प्रवाल भित्तियों, विशेष रूप से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और मन्नार की खाड़ी में महत्वपूर्ण विरंजन (ब्लीचिंग) की घटनाओं और क्षरण का कारण बन रहे हैं। प्रभाव: यह इन भित्तियों पर निर्भर समुद्री जीवन के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है, जिससे मत्स्य पालन, पर्यटन और तटीय समुदायों की आजीविका प्रभावित होती है। इन नाजुक पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के लिए तत्काल संरक्षण उपायों और वैश्विक जलवायु कार्रवाई की आवश्यकता है।
जैव विविधता संरक्षण पर नई राष्ट्रीय नीति का शुभारंभ
2026-04-24
पृष्ठभूमि: भारत में समृद्ध जैव विविधता है लेकिन आवास विनाश, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण इसके संरक्षण में चुनौतियाँ हैं। प्रभावी प्रबंधन के लिए एक मजबूत नीति ढाँचा आवश्यक है। वर्तमान संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जैव विविधता संरक्षण पर एक नई राष्ट्रीय नीति का अनावरण किया है, जिसका उद्देश्य इन-सीटू (स्थान पर) और एक्स-सीटू (स्थान से बाहर) संरक्षण प्रयासों को मजबूत करना है। नीति में सामुदायिक भागीदारी, टिकाऊ संसाधन उपयोग और पारंपरिक ज्ञान के एकीकरण पर जोर दिया गया है। प्रभाव: इस नीति से लुप्तप्राय प्रजातियों की सुरक्षा बढ़ाने, क्षरित आवासों को बहाल करने और टिकाऊ विकास प्रथाओं को बढ़ावा देने की उम्मीद है, जिससे भारत की प्राकृतिक विरासत को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित किया जा सके।
लुप्तप्राय प्रजातियों की सुरक्षा के लिए संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार
2026-04-24
पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों जैसे संरक्षित क्षेत्र जैव विविधता के संरक्षण और लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आश्रय प्रदान करने हेतु महत्वपूर्ण हैं। उनकी प्रभावी प्रबंधन प्रजातियों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने विभिन्न राज्यों में कई मौजूदा संरक्षित क्षेत्रों के विस्तार और नए क्षेत्रों के निर्धारण को मंजूरी दी है। यह पहल बंगाल टाइगर, हिम तेंदुए और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जैसी प्रजातियों के लिए बढ़ते खतरों को उजागर करने वाले हालिया आकलन से प्रेरित है। प्रभाव: विस्तार से बड़े, सन्निहित आवास मिलेंगे, मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा, और गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों की आनुवंशिक विविधता और दीर्घकालिक अस्तित्व की संभावनाओं में सुधार होगा, जो भारत के संरक्षण लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
Home Exams Jobs Current Affairs Mock Tests