RBI ने प्रमुख नीतिगत दरों पर यथास्थिति बनाए रखी
2026-09-13पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) आम तौर पर मुद्रास्फीति को प्रबंधित करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए हर दो महीने में अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) के पास रेपो दर, रिवर्स रेपो दर और अन्य प्रमुख नीतिगत साधनों को निर्धारित करने का अधिकार है।
वर्तमान संदर्भ: 12 सितंबर, 2026 को अपनी नवीनतम द्विमासिक समीक्षा में, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर को 5.75% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह निर्णय मुख्य रूप से कुछ कोर मुद्रास्फीति में नरमी के बावजूद, विशेष रूप से खाद्य और ऊर्जा की कीमतों में लगातार मुद्रास्फीति की चिंताओं से प्रेरित था। समिति का लक्ष्य विकास का समर्थन करते हुए मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप सुनिश्चित करना है।
प्रभाव: इस निर्णय से व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए ऋण और उधार की लागत में स्थिरता बनाए रखने की उम्मीद है। यह मुद्रास्फीति-लक्ष्यीकरण जनादेश के प्रति आरबीआई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो संभावित रूप से निरंतर निवेश और उपभोग को प्रोत्साहित करता है, साथ ही मुद्रास्फीति के दबावों पर भी बारीकी से नजर रखता है।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में मामूली वृद्धि देखी गई
2026-09-13पृष्ठभूमि: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) एक प्रमुख संकेतक है जो अर्थव्यवस्था में विभिन्न उद्योगों की विकास दर को मापता है। यह राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा मासिक रूप से जारी किया जाता है।
वर्तमान संदर्भ: 11 सितंबर, 2026 को जारी अनंतिम आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई 2026 के लिए IIP पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में 4.2% बढ़ा। यह वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन से प्रेरित थी, जो 4.5% बढ़ा, और खनन क्षेत्र में 3.8% की मध्यम वृद्धि हुई। हालांकि, बिजली क्षेत्र में मामूली मंदी देखी गई।
प्रभाव: IIP में मामूली वृद्धि औद्योगिक गतिविधि में क्रमिक सुधार का सुझाव देती है, जो आर्थिक भावना के लिए एक सकारात्मक संकेत प्रदान करती है। इससे रोजगार के अवसरों में वृद्धि और कॉर्पोरेट आय में वृद्धि हो सकती है, जो समग्र आर्थिक विस्तार में योगदान देगा। हालांकि, क्षेत्रों में असमान प्रदर्शन निरंतर नीतिगत समर्थन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।