वैश्विक दबावों के बीच आरबीआई ने रेपो दर 6.25% पर बरकरार रखी
2026-08-09पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और विकास को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक संकेतकों की नियमित समीक्षा करती है। प्रमुख ब्याज दरों पर इसके निर्णय देश के वित्तीय परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं। वर्तमान संदर्भ: 9 अगस्त, 2026 को अपनी नवीनतम समीक्षा में, आरबीआई की एमपीसी ने रेपो दर को 6.25% पर बनाए रखने का फैसला किया। यह निर्णय लगातार वैश्विक मुद्रास्फीति दबावों और मजबूत घरेलू मांग के कारण लिया गया, जो मूल्य स्थिरता के लिए बाजार की उम्मीदों के अनुरूप है। एमपीसी ने लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रभाव: यह सतर्क रुख आरबीआई की मुद्रास्फीति नियंत्रण को प्राथमिकता देने का संकेत देता है। यह बैंक ऋण दरों को प्रभावित करेगा, जिससे उपभोक्ता ऋण और कॉर्पोरेट उधार प्रभावित होंगे। जबकि व्यवसायों को स्थिर उधार लागत का सामना करना पड़ सकता है, अनुमानित नीतिगत माहौल का उद्देश्य दीर्घकालिक निवेश विश्वास को बढ़ावा देना और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।
सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 'ग्लोबल मार्केट एक्सेस इनिशिएटिव 2.0' लॉन्च किया
2026-08-09पृष्ठभूमि: भारत ने व्यापार घाटे को कम करने और वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अपनी निर्यात क्षमताओं को बढ़ाने पर लगातार ध्यान केंद्रित किया है। घरेलू निर्माताओं और निर्यातकों का समर्थन करने वाली पिछली योजनाओं के विभिन्न परिणाम रहे हैं। वर्तमान संदर्भ: 9 अगस्त, 2026 को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने "ग्लोबल मार्केट एक्सेस इनिशिएटिव 2.0" (GMAI 2.0) का अनावरण किया। यह नई योजना लक्षित प्रोत्साहन, व्यापक बाजार अनुसंधान सहायता और विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और उभरते क्षेत्रों के लिए ऋण तक सुव्यवस्थित पहुंच प्रदान करके भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई है। प्रभाव: GMAI 2.0 से भारत के निर्यात प्रदर्शन में पर्याप्त वृद्धि होने की उम्मीद है। बाजार विविधीकरण को सुविधाजनक बनाकर और महत्वपूर्ण वित्तीय और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करके, इसका उद्देश्य भारतीय उत्पादों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश करने में मदद करना है। इस पहल से कई रोजगार के अवसर पैदा होने और देश के सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत की वैश्विक व्यापार उपस्थिति मजबूत होगी।