RBI ने लगातार सातवीं बार रेपो दर 6.50% पर बरकरार रखी
2026-08-06पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मुद्रास्फीति को प्रबंधित करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए समय-समय पर मौद्रिक नीति समीक्षाएं करता है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) अर्थव्यवस्था में तरलता और ब्याज दरों को प्रभावित करने के लिए एक प्रमुख उपकरण, रेपो दर पर निर्णय लेती है।
वर्तमान संदर्भ: 6 अगस्त, 2026 को अपनी नवीनतम मौद्रिक नीति घोषणा में, RBI की MPC ने नीतिगत रेपो दर को 6.50% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह लगातार सातवीं बैठक है जहाँ दर स्थिर रखी गई है, जो विकास के उद्देश्यों के साथ मुद्रास्फीति नियंत्रण को संतुलित करने के प्रति सतर्क दृष्टिकोण को दर्शाता है।
प्रभाव: इस निर्णय से ऋण देने और उधार लेने की लागत में स्थिरता बनाए रखने की उम्मीद है, जिससे व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए एक अनुमानित वातावरण मिलेगा। यह मुद्रास्फीति के दबावों के प्रति सतर्क रहते हुए वर्तमान आर्थिक प्रक्षेपवक्र में RBI के विश्वास को दर्शाता है।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 7.0% GDP वृद्धि का अनुमान लगाया
2026-08-06पृष्ठभूमि: भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि आर्थिक प्रदर्शन का एक प्रमुख संकेतक है। RBI अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य का आकलन करने और अपने मौद्रिक नीति निर्णयों को सूचित करने के लिए नियमित रूप से GDP वृद्धि का पूर्वानुमान लगाता है।
वर्तमान संदर्भ: 6 अगस्त, 2026 को जारी अपनी मौद्रिक नीति वक्तव्य के हिस्से के रूप में, RBI ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 7.0% की GDP वृद्धि दर का अनुमान लगाया है। यह अनुमान मजबूत घरेलू मांग, ग्रामीण और शहरी खपत में अपेक्षित सुधार, और औद्योगिक व सेवा क्षेत्रों के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण जैसे कारकों पर आधारित है।
प्रभाव: 7.0% की GDP वृद्धि दर मजबूत आर्थिक गति का संकेत देती है, जिससे रोजगार के अवसरों में वृद्धि, आय में वृद्धि और जीवन स्तर में सुधार हो सकता है। यह वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की स्थिति को भी बढ़ाता है और आगे विदेशी निवेश को आकर्षित कर सकता है।