मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं के बीच आरबीआई ने रेपो दर बरकरार रखी
2026-07-27पृष्ठभूमि: भारत का केंद्रीय बैंक, आरबीआई, मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए नियमित रूप से अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है। हाल की वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू मांग में उतार-चढ़ाव ने आरबीआई को सतर्क रखा है। वर्तमान संदर्भ: 27 जुलाई, 2026 को अपनी नवीनतम समीक्षा में, मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो दर को 6.5% पर बनाए रखा, जिसमें विशेष रूप से खाद्य और ऊर्जा में लगातार मुद्रास्फीति के दबाव का हवाला दिया गया। आरबीआई ने स्थायी विकास का समर्थन करते हुए मुद्रास्फीति को लक्ष्य सीमा के भीतर लाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रभाव: यह निर्णय मुद्रास्फीति की उम्मीदों को स्थिर करने के उद्देश्य से एक सतर्क दृष्टिकोण का संकेत देता है। व्यवसायों को लगातार उच्च उधार लागत का सामना करना पड़ सकता है, जिससे निवेश निर्णयों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, यह दीर्घकालिक वित्तीय नियोजन के लिए स्थिरता प्रदान करता है और मूल्य स्थिरता में आरबीआई की विश्वसनीयता को मजबूत करता है।
सरकार ने नई निर्यात प्रोत्साहन योजना शुरू की: वैश्विक बाजार पहुंच पहल
2026-07-27पृष्ठभूमि: भारत अपने विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने और वैश्विक व्यापार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से नीतियों का अनुसरण कर रहा है। निर्यात को प्रोत्साहित करने वाली पिछली योजनाओं के मिश्रित परिणाम सामने आए हैं, जिससे परिष्कृत रणनीतियों की आवश्यकता महसूस हुई। वर्तमान संदर्भ: 27 जुलाई, 2026 को, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने "वैश्विक बाजार पहुंच पहल" (GMAI) का अनावरण किया, जो निर्यात विविधीकरण के लिए एमएसएमई और उभरते क्षेत्रों को लक्षित सहायता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन की गई एक नई योजना है। इसमें बढ़ी हुई ऋण सुविधाएं, बाजार अनुसंधान सहायता और सरलीकृत अनुपालन प्रक्रियाएं शामिल हैं। प्रभाव: GMAI से भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है, खासकर छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए। इसका उद्देश्य भारतीय उत्पादों को नई वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत करना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और देश को एक प्रमुख निर्यात केंद्र बनाने के लक्ष्य में योगदान करना है।