आरबीआई एमपीसी ने मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच रेपो दर अपरिवर्तित रखी
2026-07-10पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) प्रमुख ब्याज दरों और तरलता उपायों का निर्धारण करने के लिए आर्थिक स्थितियों का नियमित रूप से आकलन करती है। ये निर्णय मुद्रास्फीति के प्रबंधन और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
वर्तमान संदर्भ: 10 जुलाई, 2026 को समाप्त हुई अपनी नवीनतम समीक्षा में, एमपीसी ने लगातार आठवीं बार रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह निर्णय लगातार मुद्रास्फीति दबावों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बारे में चल रही चिंताओं को दर्शाता है।
प्रभाव: आरबीआई का यह सतर्क रुख अल्पावधि में व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए उधार लेने की लागत में स्थिरता का संकेत देता है। इसका उद्देश्य मुद्रास्फीति की उम्मीदों को मजबूती से बनाए रखना है, हालांकि इससे विशिष्ट क्षेत्रों में ऋण वृद्धि थोड़ी धीमी हो सकती है।
भारत ने वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने के लिए 'राष्ट्रीय निर्यात विकास पहल' शुरू की
2026-07-10पृष्ठभूमि: भारत ने अपने व्यापार संतुलन में सुधार और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए अपनी निर्यात क्षमताओं को बढ़ाने पर लगातार ध्यान केंद्रित किया है। विभिन्न क्षेत्रों में निर्यातकों को प्रोत्साहन और सहायता प्रदान करने के लिए समय-समय पर विभिन्न सरकारी योजनाएं शुरू की जाती हैं।
वर्तमान संदर्भ: 9 जुलाई, 2026 को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने "राष्ट्रीय निर्यात विकास पहल (एनईजीआई)" का अनावरण किया। यह नई व्यापक योजना उच्च-विकास वाले क्षेत्रों के लिए लक्षित प्रोत्साहन प्रदान करके और जटिल निर्यात प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करके अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई है।
प्रभाव: एनईजीआई से भारत के समग्र निर्यात प्रदर्शन में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और वस्त्र जैसे प्रमुख क्षेत्रों को लाभ होगा। इसका उद्देश्य नए रोजगार के अवसर पैदा करना और देश के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देना है।