सरकार ने उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए नई पीएलआई योजना का अनावरण किया
2026-07-01पृष्ठभूमि: भारत विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं के माध्यम से घरेलू विनिर्माण को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है और आयात पर निर्भरता कम कर रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना, रोजगार सृजित करना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करना है। वर्तमान संदर्भ: 28 जून, 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए एक नई पीएलआई योजना की घोषणा की। लगभग 15,000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली यह पहल, पांच वर्षों में वैश्विक खिलाड़ियों को आकर्षित करने और उच्च-मूल्य वाले इलेक्ट्रॉनिक घटकों में स्वदेशी नवाचार को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखती है। प्रभाव: इस योजना से घरेलू मूल्यवर्धन में उल्लेखनीय वृद्धि होने, पर्याप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित होने और 2 लाख से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। यह भारत की तकनीकी क्षमताओं को भी बढ़ाएगी और आयातित उन्नत इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर निर्भरता कम करेगी, जिससे आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता में योगदान मिलेगा।
आरबीआई की एमपीसी ने लगातार मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच रेपो दर 6.5% पर बरकरार रखी
2026-07-01पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) नियमित रूप से आर्थिक स्थिति की समीक्षा करती है और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने तथा विकास को समर्थन देने के लिए प्रमुख ब्याज दरों पर निर्णय लेती है। रेपो दर अर्थव्यवस्था में उधार दरों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण उपकरण है। वर्तमान संदर्भ: 30 जून, 2026 को समाप्त हुई अपनी द्विमासिक बैठक में, एमपीसी ने सर्वसम्मति से बेंचमार्क रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह निर्णय मजबूत आर्थिक विकास के संकेतों के बावजूद, खाद्य मुद्रास्फीति और वैश्विक कमोडिटी मूल्य अस्थिरता पर लगातार चिंताओं के बीच आया है। एमपीसी ने मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए समायोजन वापस लेने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रभाव: रेपो दर को बनाए रखने से मुद्रास्फीति पर आरबीआई के सतर्क रुख का संकेत मिलता है, जिससे अल्पावधि में उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए उधार लागत स्थिर रह सकती है। हालांकि, यह यह भी दर्शाता है कि मुद्रास्फीति का दबाव काफी कम होने तक आगे दर कटौती की संभावना नहीं है, जिससे निवेश निर्णयों और समग्र बाजार भावना पर असर पड़ेगा।
प्रमुख भारतीय समूह ने हरित हाइड्रोजन में 20,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की
2026-07-01पृष्ठभूमि: भारत आक्रामक रूप से नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों का पीछा कर रहा है और हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए एक वैश्विक केंद्र बनने का लक्ष्य रखता है। कई बड़े निगम उभरते हरित ऊर्जा बाजार का लाभ उठाने के लिए अपनी रणनीतियों को राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ संरेखित कर रहे हैं। वर्तमान संदर्भ: 1 जुलाई, 2026 को, एक प्रमुख भारतीय समूह, 'भारत इंडस्ट्रीज ग्रुप' ने अगले तीन वर्षों में हरित हाइड्रोजन उत्पादन और संबंधित बुनियादी ढांचे में 20,000 करोड़ रुपये के भारी निवेश की घोषणा की। इस रणनीतिक कदम में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रोलाइजर विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करना और हरित हाइड्रोजन निर्यात क्षमताओं का विकास करना शामिल है। प्रभाव: यह महत्वपूर्ण निवेश भारत के हरित ऊर्जा अर्थव्यवस्था में संक्रमण को गति देने, हजारों उच्च-कुशल रोजगार सृजित करने और नवीकरणीय क्षेत्र में और निवेश आकर्षित करने के लिए तैयार है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा, कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा और देश को वैश्विक हरित हाइड्रोजन बाजार में एक अग्रणी के रूप में स्थापित करेगा, जिससे सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।