आरबीआई ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रेपो दर को अपरिवर्तित रखा, जीडीपी अनुमान संशोधित किया
2026-06-29पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए नियमित रूप से अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें, घरेलू खाद्य मुद्रास्फीति और औद्योगिक उत्पादन जैसे कारक अक्सर इन निर्णयों को प्रभावित करते हैं। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 की अपनी समीक्षा में, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने वैश्विक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति को 4% (+/- 2%) के लक्ष्य बैंड के भीतर रखने की आवश्यकता का हवाला देते हुए रेपो दर को 6.5% पर बनाए रखने का फैसला किया। हालांकि, इसने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने जीडीपी विकास अनुमान को थोड़ा बढ़ाकर 7.1% कर दिया। प्रभाव: यह निर्णय आरबीआई के सतर्क दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो बढ़ती विकास संभावनाओं को स्वीकार करते हुए मूल्य स्थिरता को प्राथमिकता देता है। यह वित्तीय बाजारों और व्यवसायों के लिए निरंतरता प्रदान करता है, हालांकि कुछ क्षेत्रों ने ऋण मांग को बढ़ावा देने के लिए दर में कटौती की उम्मीद की होगी। विकास अनुमान में ऊपर की ओर संशोधन निवेशकों का विश्वास बढ़ा सकता है।
जून 2026 में भारत का विनिर्माण पीएमआई कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा
2026-06-29पृष्ठभूमि: परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) एक प्रमुख आर्थिक संकेतक है, जो विनिर्माण क्षेत्र के स्वास्थ्य को दर्शाता है। 50 से ऊपर की रीडिंग विस्तार का संकेत देती है, जबकि 50 से नीचे संकुचन का सुझाव देती है। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 में भारत का विनिर्माण पीएमआई बढ़कर 58.3 हो गया, जो पांच वर्षों में इसका उच्चतम स्तर है। यह मजबूत नए ऑर्डर, बढ़े हुए उत्पादन और बेहतर आपूर्ति श्रृंखला दक्षता से प्रेरित है। यह मजबूत प्रदर्शन देश भर में औद्योगिक गतिविधि और व्यावसायिक विश्वास में महत्वपूर्ण उछाल का संकेत देता है। प्रभाव: उच्च पीएमआई विनिर्माण क्षेत्र के लिए मजबूत अंतर्निहित मांग और सकारात्मक दृष्टिकोण का सुझाव देता है, जिससे संभावित रूप से रोजगार सृजन और निवेश में वृद्धि हो सकती है। यह वृद्धि समग्र जीडीपी विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है और भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में मजबूत कर सकती है, जिससे आगे विदेशी निवेश आकर्षित होगा।