आरबीआई ने मुद्रास्फीति पर सतर्कता के बीच प्रमुख नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखा
2026-06-25पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने, आर्थिक विकास का समर्थन करने और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से मौद्रिक नीति समीक्षा करता है। इन समीक्षाओं में अक्सर रेपो दर जैसी प्रमुख ब्याज दरों पर निर्णय शामिल होते हैं। वर्तमान संदर्भ: अपनी नवीनतम मध्य-तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा में, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो दर को 6.5% पर बनाए रखने और 'समायोजन की वापसी' के रुख को जारी रखने का फैसला किया। यह निर्णय एक सतर्क दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो मजबूत घरेलू वृद्धि को लगातार वैश्विक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति को लक्ष्य सीमा के भीतर लाने की आवश्यकता के साथ संतुलित करता है। प्रभाव: नीतिगत दरों में यह स्थिरता व्यवसायों और उधारकर्ताओं के लिए पूर्वानुमेयता प्रदान करती है। यह विकास का समर्थन करते हुए मूल्य स्थिरता के प्रति आरबीआई की प्रतिबद्धता का संकेत देता है, जिससे बैंकों के लिए उधार दरों और अर्थव्यवस्था में समग्र निवेश भावना प्रभावित होती है।
सरकार ने हरित प्रौद्योगिकियों के लिए नई पीएलआई योजना शुरू की
2026-06-25पृष्ठभूमि: भारत रणनीतिक क्षेत्रों में विभिन्न उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं के माध्यम से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात निर्भरता को कम करने में सक्रिय रहा है। ये योजनाएं भारत में निर्मित उत्पादों से वृद्धिशील बिक्री पर प्रोत्साहन प्रदान करती हैं। वर्तमान संदर्भ: केंद्र सरकार ने विशेष रूप से हरित प्रौद्योगिकियों, जिसमें उन्नत बैटरी भंडारण, हरित हाइड्रोजन घटक और उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल शामिल हैं, के लिए एक नई पीएलआई योजना की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित करना, नवाचार को बढ़ावा देना और स्थायी ऊर्जा क्षेत्रों में एक मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है। प्रभाव: इस योजना से स्थानीय उत्पादन क्षमताओं को बढ़ावा मिलने, कई रोजगार के अवसर पैदा होने और भारत को हरित प्रौद्योगिकी विनिर्माण के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होने की उम्मीद है। यह भारत की जलवायु परिवर्तन प्रतिबद्धताओं और ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने भारत के वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के जीडीपी वृद्धि अनुमानों को ऊपर की ओर संशोधित किया
2026-06-25पृष्ठभूमि: आईएमएफ और विश्व बैंक जैसे वैश्विक वित्तीय संस्थान नियमित रूप से प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के लिए आर्थिक विकास दरों का आकलन और अनुमान लगाते हैं, जो वैश्विक आर्थिक रुझानों में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। ये पूर्वानुमान निवेशक विश्वास और नीति नियोजन के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भारत के वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि अनुमानों को ऊपर की ओर संशोधित किया है। यह सकारात्मक संशोधन विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन, लचीली घरेलू खपत और सरकारी पूंजीगत व्यय के कारण आया है। प्रभाव: ऊपर की ओर संशोधन मजबूत आर्थिक गति और भारत के प्रति बेहतर निवेशक भावना का संकेत देता है। इससे आगे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और पोर्टफोलियो निवेश आकर्षित होने की संभावना है, जिससे रुपया मजबूत होगा और संभावित रूप से देश के लिए अधिक अनुकूल क्रेडिट रेटिंग दृष्टिकोण बन सकता है।