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भारतीय अर्थव्यवस्था और व्यापार अपडेट: आरबीआई, निर्यात, डिजिटल भुगतान

स्थिर मुद्रास्फीति और मजबूत विकास के बीच आरबीआई ने रेपो दर को बनाए रखा
2026-06-20
पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मुद्रास्फीति, तरलता और आर्थिक विकास को प्रबंधित करने के लिए द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा करता है। ये समीक्षाएँ रेपो दर जैसी प्रमुख ब्याज दरों को निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो अर्थव्यवस्था में उधार लेने की लागत और निवेश निर्णयों को प्रभावित करती हैं। वर्तमान संदर्भ: 19 जून, 2026 को अपनी नवीनतम समीक्षा में, मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने लक्ष्य सीमा के भीतर स्थिर मुद्रास्फीति और मजबूत घरेलू आर्थिक विकास का हवाला देते हुए रेपो दर को 6.5% पर बनाए रखने का फैसला किया। आरबीआई ने मुद्रास्फीति की उम्मीदों को स्थिर रखते हुए विकास का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रभाव: यह निर्णय व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए स्थिरता और पूर्वानुमेयता प्रदान करता है, निवेश और उपभोग को प्रोत्साहित करता है। यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक लचीलेपन में विश्वास का संकेत देता है, संभावित रूप से विदेशी पूंजी को आकर्षित करता है और वर्तमान विकास गति को बनाए रखता है।
सरकार ने नई निर्यात प्रोत्साहन योजना 'निर्यात सहयोग योजना' का अनावरण किया
2026-06-20
पृष्ठभूमि: भारत ने 2030 तक $1 ट्रिलियन निर्यात लक्ष्य प्राप्त करने और अपने व्यापार घाटे को कम करने के लिए लगातार अपने माल और सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा है। निर्यातकों को प्रोत्साहन और सहायता प्रदान करने के लिए MEIS और RoDTEP जैसी विभिन्न योजनाएँ लागू की गई हैं। वर्तमान संदर्भ: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 18 जून, 2026 को "निर्यात सहयोग योजना" नामक एक नई पहल शुरू की, जिसे वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह विशेष रूप से MSMEs के लिए लक्षित प्रोत्साहन, आसान ऋण पहुंच और बाजार विविधीकरण के लिए सहायता प्रदान करती है। प्रभाव: इस योजना से भारत के निर्यात प्रदर्शन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, खासकर उभरते क्षेत्रों और छोटे व मध्यम उद्यमों के लिए। यह नए रोजगार के अवसर पैदा करने, घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने और विदेशी मुद्रा आय में योगदान करने में मदद करेगा, जिससे देश की आर्थिक स्थिरता और विकास को बल मिलेगा।
मई 2026 में डिजिटल भुगतान क्षेत्र ने सर्वकालिक उच्च वृद्धि दर्ज की
2026-06-20
पृष्ठभूमि: भारत डिजिटल भुगतान क्रांति में सबसे आगे रहा है, जो मुख्य रूप से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहलों द्वारा संचालित है। इसने लाखों लोगों के लिए वित्तीय लेनदेन को बदल दिया है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा 17 जून, 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में डिजिटल भुगतान लेनदेन सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिसमें 15 बिलियन से अधिक लेनदेन और कुल मूल्य ₹25 ट्रिलियन से अधिक रहा। यह वृद्धि खुदरा, ई-कॉमर्स और व्यक्ति-से-व्यक्ति हस्तांतरण में बढ़ती स्वीकृति को दर्शाती है। प्रभाव: यह रिकॉर्ड वृद्धि गहरी वित्तीय समावेशन और एक मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे का प्रतीक है। यह अर्थव्यवस्था की नकदी पर निर्भरता को कम करता है, लेनदेन दक्षता को बढ़ाता है, और फिनटेक नवाचार के लिए एक उपजाऊ जमीन प्रदान करता है। यह प्रवृत्ति आर्थिक औपचारिकता का समर्थन करती है और भारत के डिजिटल अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
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