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अर्थव्यवस्था और व्यापार समाचार: आरबीआई नीति, एमएसएमई निर्यात, हरित एफडीआई (जून 2026)

बदलती मुद्रास्फीति गतिशीलता के बीच आरबीआई ने रेपो दर अपरिवर्तित रखी
2026-06-17
पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए अपनी मौद्रिक नीति की लगातार समीक्षा करता है। वैश्विक कमोडिटी मूल्य अस्थिरता और घरेलू मांग हाल के निर्णयों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक रहे हैं। वर्तमान संदर्भ: 17 जून, 2026 को अपनी नवीनतम मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में, आरबीआई ने लगातार आठवीं बार बेंचमार्क रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। एमपीसी ने मध्यम लेकिन लगातार मुद्रास्फीति दबावों का हवाला दिया और वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति का औसत 4.8% रहने का अनुमान लगाया, जिसमें डेटा-निर्भर दृष्टिकोण पर जोर दिया गया। प्रभाव: यह निर्णय आरबीआई के सतर्क रुख का संकेत देता है, जिसका उद्देश्य स्थिर विकास का समर्थन करते हुए मुद्रास्फीति की उम्मीदों को स्थिर करना है। व्यवसायों को अनुमानित उधार लागत से लाभ हो सकता है, हालांकि उपभोक्ताओं को विशिष्ट क्षेत्रों में मूल्य दबाव का सामना करना पड़ सकता है। इस कदम से वित्तीय बाजारों में स्थिरता आने की उम्मीद है, जिसमें भविष्य की कार्रवाई आर्थिक संकेतकों से जुड़ी होगी।
सरकार ने एमएसएमई के लिए नई निर्यात प्रोत्साहन योजना शुरू की
2026-06-17
पृष्ठभूमि: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भारत के आर्थिक विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण हैं, फिर भी अक्सर वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने में संघर्ष करते हैं। सरकार ने व्यापार घाटे को कम करने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए लगातार निर्यात को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया है। वर्तमान संदर्भ: 15 जून, 2026 को, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने "ग्लोबल रीच एमएसएमई एक्सपोर्ट इनिशिएटिव" (जीआरएमईआई) का अनावरण किया। यह व्यापक योजना एमएसएमई को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश करने में मदद करने के लिए उन्नत वित्तीय प्रोत्साहन, निर्यात ऋण तक सुव्यवस्थित पहुंच और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करती है। इसमें भारतीय एमएसएमई को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से प्रौद्योगिकी उन्नयन और गुणवत्ता प्रमाणन के प्रावधान भी शामिल हैं। प्रभाव: इस पहल से भारत के समग्र निर्यात प्रदर्शन, विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र से, में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। यह छोटे व्यवसायों को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने, नए रोजगार के अवसर पैदा करने और भारत की निर्यात टोकरी में विविधता लाने में सशक्त करेगा, जिससे वैश्विक व्यापार में देश की स्थिति मजबूत होगी।
भारत ने हरित ऊर्जा क्षेत्र में $5 बिलियन का एफडीआई आकर्षित किया
2026-06-17
पृष्ठभूमि: भारत के पास नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विस्तार के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य हैं और वह हरित अर्थव्यवस्था में अपने संक्रमण को वित्तपोषित करने के लिए सक्रिय रूप से विदेशी निवेश चाहता है। महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एफडीआई के लिए एक आकर्षक वातावरण बनाने में सरकारी नीतियां सहायक रही हैं। वर्तमान संदर्भ: 16 जून, 2026 को, ग्लोबल ग्रीन वेंचर्स के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के एक संघ ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में $5 बिलियन के पर्याप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की घोषणा की। यह निवेश भारत के दीर्घकालिक स्थिरता लक्ष्यों के अनुरूप, कई राज्यों में बड़े पैमाने पर सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के साथ-साथ हरित हाइड्रोजन बुनियादी ढांचे के विकास के लिए निर्धारित है। प्रभाव: पूंजी का यह महत्वपूर्ण प्रवाह भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में तेजी लाएगा, जिससे देश को अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इससे विनिर्माण, निर्माण और संचालन में कई नौकरियां पैदा होने, तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने और वैश्विक हरित ऊर्जा परिदृश्य में भारत के नेतृत्व को मजबूत करने की उम्मीद है।
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