आरबीआई ने वित्त वर्ष 25 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.2% पर बरकरार रखा
2026-06-11पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) समय-समय पर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि का आकलन और पूर्वानुमान जारी करता है। यह पूर्वानुमान भारतीय अर्थव्यवस्था के समग्र स्वास्थ्य और दिशा को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
वर्तमान संदर्भ: अपने नवीनतम आकलन में, आरबीआई ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि के अनुमान को 7.2% पर बनाए रखने का निर्णय लिया है। यह निर्णय निरंतर घरेलू मांग, बेहतर ग्रामीण उपभोग और मजबूत निवेश गतिविधियों की अपेक्षाओं पर आधारित है।
प्रभाव: यह स्थिर वृद्धि का अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन में विश्वास को दर्शाता है। इससे आगे निवेश को बढ़ावा मिलने, रोजगार सृजन में सहायता मिलने और सकारात्मक कारोबारी माहौल में योगदान मिलने की उम्मीद है, जो सरकार के आर्थिक उद्देश्यों में सहायक होगा।
वित्त वर्ष 25 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति के 4.5% तक कम होने का अनुमान
2026-06-11पृष्ठभूमि: खुदरा मुद्रास्फीति, जिसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा मापा जाता है, मूल्य स्थिरता का एक प्रमुख संकेतक है और यह घरेलू क्रय शक्ति को प्रभावित करती है। आरबीआई मौद्रिक नीति के प्रबंधन के लिए मुद्रास्फीति की बारीकी से निगरानी करता है।
वर्तमान संदर्भ: भारतीय रिज़र्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति 4.5% तक कम हो जाएगी। यह अनुमान सामान्य मानसून, स्थिर वैश्विक वस्तु कीमतों और खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरकारी आपूर्ति-पक्ष के हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता पर आधारित है।
प्रभाव: कम मुद्रास्फीति दर उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद है क्योंकि यह उनकी वास्तविक आय और क्रय शक्ति को बढ़ाती है। यह आरबीआई को अपनी मौद्रिक नीति निर्णयों में अधिक लचीलापन भी प्रदान करती है, जिससे संभावित रूप से स्थिर ब्याज दरें और आर्थिक विकास को समर्थन मिल सकता है।