स्थिर मुद्रास्फीति दृष्टिकोण के बीच आरबीआई ने रेपो दर 6.5% पर बरकरार रखी
2026-05-30पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) आर्थिक स्थितियों का आकलन करने और प्रमुख ब्याज दरों को निर्धारित करने के लिए द्विमासिक बैठक करती है। इसका प्राथमिक उद्देश्य विकास का समर्थन करते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना है। वर्तमान संदर्भ: अपनी नवीनतम समीक्षा में, एमपीसी ने रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह निर्णय स्थिर मुद्रास्फीति प्रक्षेपवक्र, जो लक्ष्य सीमा के भीतर है, और मजबूत घरेलू आर्थिक विकास से प्रभावित था। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताएं एक निगरानी कारक बनी हुई हैं। प्रभाव: ब्याज दरों में यह स्थिरता उधारकर्ताओं और निवेशकों के लिए निरंतरता प्रदान करने, ऋण वृद्धि और पूंजीगत व्यय के लिए एक अनुमानित वातावरण को बढ़ावा देने और इस प्रकार समग्र आर्थिक गति का समर्थन करने की उम्मीद है।
सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 'ग्लोबल मार्केट एक्सेस इनिशिएटिव 2.0' लॉन्च किया
2026-05-30पृष्ठभूमि: भारत ने वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं, जिसके लिए निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने हेतु रणनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है। पिछली योजनाएं विशिष्ट क्षेत्रों या बाजार पहुंच पर केंद्रित थीं। वर्तमान संदर्भ: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 'ग्लोबल मार्केट एक्सेस इनिशिएटिव 2.0' का अनावरण किया है, जो भारत के निर्यात बास्केट में विविधता लाने और नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन की गई एक व्यापक योजना है। यह इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और वस्त्र जैसे पहचाने गए उच्च-संभावित क्षेत्रों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन, बाजार खुफिया सहायता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम प्रदान करता है। प्रभाव: इस पहल से निर्यात की मात्रा बढ़ने, रोजगार के अवसर पैदा होने और भारतीय उत्पादों को विश्व स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाकर भारत के व्यापार संतुलन में सुधार होने की उम्मीद है।
घरेलू मांग के बीच भारत की Q4 FY26 जीडीपी वृद्धि मजबूत रहने का अनुमान
2026-05-30पृष्ठभूमि: सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) किसी राष्ट्र के आर्थिक स्वास्थ्य का एक प्रमुख संकेतक है, जो उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाता है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा नियमित विज्ञप्ति महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करती है। वर्तमान संदर्भ: एनएसओ ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि के अपने अग्रिम अनुमान जारी किए हैं। अनुमान एक मजबूत विस्तार का संकेत देते हैं, जो मुख्य रूप से निरंतर घरेलू खपत, बढ़े हुए सरकारी पूंजीगत व्यय और निजी क्षेत्र के निवेश में पुनरुद्धार से प्रेरित है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों ने विशेष लचीलापन दिखाया। प्रभाव: एक मजबूत जीडीपी वृद्धि प्रक्षेपवक्र निवेशक विश्वास को मजबूत करता है, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करता है, और सरकार को आगे की विकासात्मक पहलों के लिए राजकोषीय स्थान प्रदान करता है, जिससे समग्र आर्थिक समृद्धि में योगदान होता है।