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RBI डिजिटल लेंडिंग, मुद्रास्फीति, विनिर्माण, FDI - मई 2026

RBI ने डिजिटल ऋणों के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए
2026-05-19
पृष्ठभूमि: भारत में डिजिटल ऋण प्लेटफार्मों के तेजी से विकास ने उपभोक्ता संरक्षण और निष्पक्ष ऋण प्रथाओं के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस क्षेत्र की बारीकी से निगरानी कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: 17 मई, 2026 को, RBI ने डिजिटल ऋणों के लिए व्यापक दिशानिर्देशों का एक सेट जारी किया। इन नियमों में ऋण मूल्य निर्धारण में बढ़ी हुई पारदर्शिता अनिवार्य है, अत्यधिक ब्याज दरों पर रोक लगाई गई है, और ऋणदाताओं को स्पष्ट ऋण समझौते प्रदान करने की आवश्यकता है। वे उधारकर्ताओं के लिए डेटा गोपनीयता और सुरक्षा पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं। प्रभाव: इन विनियमों से शिकारी ऋण प्रथाओं पर अंकुश लगने, उधारकर्ताओं और डिजिटल ऋणदाताओं के बीच अधिक विश्वास पैदा होने और भारत में एक अधिक जिम्मेदार और टिकाऊ डिजिटल ऋण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
अप्रैल 2026 में भारत की खुदरा मुद्रास्फीति में नरमी आई
2026-05-19
पृष्ठभूमि: मुद्रास्फीति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय रही है, जो क्रय शक्ति और मौद्रिक नीति निर्णयों को प्रभावित करती है। RBI मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए मुद्रास्फीति के रुझानों की बारीकी से निगरानी करता है। वर्तमान संदर्भ: 15 मई, 2026 को जारी अनंतिम आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) द्वारा मापी गई भारत की खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 4.7% हो गई। यह नरमी मुख्य रूप से खाद्य मुद्रास्फीति में आई महत्वपूर्ण गिरावट, विशेष रूप से सब्जी और दालों की कीमतों के कारण हुई। प्रभाव: मुद्रास्फीति में नरमी से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है और यह RBI को अपनी मौद्रिक नीति के रुख में कुछ लचीलापन प्रदान कर सकती है। हालांकि, मुख्य मुद्रास्फीति ऊंची बनी हुई है, जो अंतर्निहित मूल्य दबावों का संकेत देती है जिस पर निरंतर निगरानी की आवश्यकता है।
PLI योजना ने भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा दिया
2026-05-19
पृष्ठभूमि: उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना को भारतीय सरकार द्वारा घरेलू विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लॉन्च किया गया था, जिससे भारत एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बन सके। वर्तमान संदर्भ: 18 मई, 2026 तक, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि PLI योजना ने इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोटिव जैसे प्रमुख क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कई कंपनियों ने योजना के तहत अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार किया है और रोजगार बढ़ाया है। प्रभाव: PLI योजना भारत की विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को और बढ़ावा मिलने और रणनीतिक क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
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