खुदरा मुद्रास्फीति 12 महीने के निचले स्तर पर
2026-05-17पृष्ठभूमि: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) भारत में खुदरा मुद्रास्फीति को मापने का प्राथमिक पैमाना है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 तक, खुदरा मुद्रास्फीति 12 महीने के निचले स्तर पर आ गई है, जिसका मुख्य कारण खाद्य और ईंधन की कीमतों में नरमी है। सरकार के आपूर्ति-पक्ष के हस्तक्षेप और अनुकूल मानसून के अनुमानों ने इस गिरावट में योगदान दिया है। प्रभाव: यह कमी परिवारों को राहत देती है और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भविष्य में ब्याज दरों में समायोजन पर विचार करने का अवसर देती है, जिससे आने वाली तिमाहियों में उपभोक्ता खर्च और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
आरबीआई ने मौद्रिक नीति पर सतर्क रुख बनाए रखा
2026-05-17पृष्ठभूमि: आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) विकास का समर्थन करते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 की अपनी मध्य-मासिक समीक्षा में, आरबीआई ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अस्थिर कमोडिटी बाजारों का हवाला देते हुए रेपो दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति को 4% (+/- 2%) के लक्ष्य दायरे में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रभाव: यह निर्णय 'प्रतीक्षा करो और देखो' के दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि बैंकिंग प्रणाली में तरलता बनी रहे और मुद्रास्फीति का दबाव फिर से न बढ़े, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता बनी रहे।