आरबीआई मौद्रिक नीति समिति ने वैश्विक चुनौतियों के बीच यथास्थिति बनाए रखी
2026-05-05पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) आर्थिक विकास का समर्थन करते हुए मुद्रास्फीति नियंत्रण को संतुलित करने के लिए मौद्रिक नीति के उचित रुख को निर्धारित करने हेतु आर्थिक स्थितियों का नियमित रूप से आकलन करती है। वर्तमान संदर्भ: 3 मई, 2026 को समाप्त हुई अपनी नवीनतम द्विमासिक समीक्षा में, एमपीसी ने सर्वसम्मति से बेंचमार्क रेपो दर को 6.50% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। समिति ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप सुनिश्चित करने की आवश्यकता का हवाला देते हुए 'समायोजन की वापसी' के अपने रुख को बनाए रखा। प्रभाव: यह निर्णय वित्तीय बाजारों और व्यवसायों के लिए स्थिरता प्रदान करता है, उधार लेने की लागत में अनुमानितता प्रदान करता है। यह आरबीआई के सतर्क दृष्टिकोण का संकेत देता है, जो घरेलू विकास गति और बाहरी कारकों की बारीकी से निगरानी करते हुए मुद्रास्फीति नियंत्रण को प्राथमिकता देता है, जिससे भविष्य के निवेश प्रभावित हो सकते हैं।
सरकार ने हरित हाइड्रोजन विनिर्माण के लिए नई पीएलआई योजना शुरू की
2026-05-05पृष्ठभूमि: भारत रणनीतिक क्षेत्रों में हरित ऊर्जा परिवर्तन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है, जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है। वर्तमान संदर्भ: 4 मई, 2026 को नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए आवश्यक इलेक्ट्रोलाइजर और प्रमुख घटकों के विनिर्माण को लक्षित करते हुए एक नई पीएलआई योजना की घोषणा की। यह पहल, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पांच साल की अवधि में वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है। प्रभाव: इस योजना से भारत के हरित हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र में पर्याप्त निजी निवेश आकर्षित होने, रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने और देश को हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की उम्मीद है। यह भारत के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान देगा और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाएगा।