आरबीआई मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो दर को अपरिवर्तित रखा
2026-04-26पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) मुद्रास्फीति नियंत्रण और विकास उद्देश्यों को संतुलित करने के लिए प्रमुख ब्याज दरों और मौद्रिक नीति रुख पर निर्णय लेने हेतु आर्थिक स्थितियों की नियमित समीक्षा करती है। वर्तमान संदर्भ: 25 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुई अपनी नवीनतम बैठक में, एमपीसी ने लगातार सातवीं बार रेपो दर को 6.5% पर बनाए रखने का फैसला किया, जिसमें लगातार वैश्विक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप सुनिश्चित करने की आवश्यकता का हवाला दिया गया। रुख 'समायोजन की वापसी' बना रहा। प्रभाव: यह निर्णय आरबीआई के सतर्क दृष्टिकोण का संकेत देता है, जो उधारकर्ताओं और निवेशकों के लिए स्थिरता प्रदान करता है, जबकि मूल्य दबावों में निरंतर कमी और मजबूत आर्थिक विकास पर भविष्य की दर में कटौती निर्भर करेगी।
भारत के वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद के विकास अनुमानों में मजबूत प्रदर्शन
2026-04-26पृष्ठभूमि: भारत की आर्थिक वृद्धि पर बारीकी से नजर रखी जाती है, जिसमें तिमाही सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़े देश के आर्थिक स्वास्थ्य और प्रक्षेपवक्र में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। रोजगार सृजन और विकास के लिए मजबूत वृद्धि महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: प्रमुख वित्तीय संस्थानों और राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने भारत के वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद के विकास के लिए अपने अग्रिम अनुमान जारी किए हैं, जिसमें इसके लगभग 7.2-7.5% रहने का अनुमान है। यह मजबूत प्रदर्शन मजबूत घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत व्यय और एक लचीले विनिर्माण क्षेत्र के कारण है। प्रभाव: उम्मीद से अधिक वृद्धि के अनुमान निवेशकों का विश्वास बढ़ाते हैं, जिससे अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित हो सकता है। यह सरकार को कल्याणकारी कार्यक्रमों और बुनियादी ढांचा विकास को आगे बढ़ाने के लिए राजकोषीय गुंजाइश भी प्रदान करता है, जिससे भारत की तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थिति मजबूत होती है।
सरकार ने हरित हाइड्रोजन के लिए नई उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की घोषणा की
2026-04-26पृष्ठभूमि: भारत सरकार आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और रोजगार सृजित करने के लिए प्रमुख क्षेत्रों में विभिन्न उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं के माध्यम से घरेलू विनिर्माण को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है और आयात निर्भरता को कम कर रही है। वर्तमान संदर्भ: 24 अप्रैल, 2026 को, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने विशेष रूप से हरित हाइड्रोजन क्षेत्र के लिए एक नई पीएलआई योजना का अनावरण किया, जिसमें पांच वर्षों में ₹15,000 करोड़ आवंटित किए गए। इस योजना का उद्देश्य इलेक्ट्रोलाइजर के घरेलू विनिर्माण और हरित हाइड्रोजन के उत्पादन को प्रोत्साहित करना है, जो भारत के शुद्ध-शून्य लक्ष्यों के अनुरूप है। प्रभाव: इस पहल से स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलने, नवीकरणीय ऊर्जा में निजी निवेश आकर्षित करने और हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की उम्मीद है। यह ऊर्जा सुरक्षा, डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों में योगदान देगा और भारत को हरित ऊर्जा संक्रमण में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करेगा।