RBI ने डिजिटल रुपया (e₹) के राष्ट्रव्यापी रोलआउट की घोषणा की
2026-04-21पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को आधुनिक बनाने और भौतिक नकदी पर निर्भरता कम करने के लिए 2022 के अंत में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। वर्तमान संदर्भ: 21 अप्रैल 2026 को, RBI ने डिजिटल रुपया (e₹) को उसके पायलट चरण से पूर्ण राष्ट्रव्यापी परिचालन चरण में स्थानांतरित करने की घोषणा की। डिजिटल मुद्रा अब सभी मर्चेंट श्रेणियों में मौजूदा UPI QR कोड के साथ पूरी तरह से एकीकृत है। प्रभाव: इस कदम से भौतिक मुद्रा प्रबंधन की लागत में काफी कमी आने, लेनदेन दक्षता बढ़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 920 बिलियन डॉलर के मील के पत्थर को पार कर गया
2026-04-21पृष्ठभूमि: भारत विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) और 'मेक इन इंडिया' पहल के माध्यम से 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के कुल निर्यात का लक्ष्य लेकर चल रहा है। वर्तमान संदर्भ: 21 अप्रैल 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारत का संयुक्त माल और सेवा निर्यात 920 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। प्रभाव: मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, हरित ऊर्जा घटकों और उच्च-स्तरीय आईटी सेवाओं द्वारा संचालित यह वृद्धि व्यापार घाटे को काफी कम करती है। यह उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं की सफलता की पुष्टि करता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के खिलाफ भारत की स्थिति को मजबूत करता है, जिससे देश एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित होता है।
शीर्ष 1000 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए अनिवार्य ESG प्रकटीकरण मानक लागू
2026-04-21पृष्ठभूमि: कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) और सेबी भारतीय कॉर्पोरेट प्रथाओं को वैश्विक निवेश रुझानों के साथ संरेखित करने के लिए ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) रिपोर्टिंग को उत्तरोत्तर पेश कर रहे हैं। वर्तमान संदर्भ: 21 अप्रैल 2026 से प्रभावी, बाजार पूंजीकरण के आधार पर शीर्ष 1000 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए नए अनिवार्य ESG प्रकटीकरण ढांचे पूरी तरह से लागू कर दिए गए हैं। प्रभाव: ये मानक कार्बन फुटप्रिंट, श्रम प्रथाओं और बोर्ड विविधता के संबंध में अधिक कॉर्पोरेट जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं। इस पारदर्शिता से स्थिरता-केंद्रित वैश्विक फंडों से उच्च विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) आकर्षित होने की उम्मीद है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय फर्मों के दीर्घकालिक मूल्यांकन और नैतिक स्थिति में सुधार होगा।