मुद्रास्फीति के दबाव के बीच आरबीआई ने रेपो दर स्थिर रखी
2026-04-16पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और तरलता का प्रबंधन करने के लिए रेपो दर का उपयोग एक प्राथमिक उपकरण के रूप में करता है। वर्तमान संदर्भ: अप्रैल 2026 तक, मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने विकास और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन बनाने के लिए रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। यह निर्णय वैश्विक कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं के बीच आया है। प्रभाव: इस कदम का उद्देश्य व्यवसायों और उपभोक्ताओं के लिए उधार लेने की लागत को स्थिर रखना है, जिससे दीर्घकालिक निवेश के लिए एक पूर्वानुमानित वातावरण तैयार हो सके।
सरकार ने विनिर्माण के लिए कॉर्पोरेट कर ढांचे की समीक्षा की
2026-04-16पृष्ठभूमि: सरकार देश को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र में बदलने के लिए 'मेक इन इंडिया' पहल को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। वर्तमान संदर्भ: अप्रैल 2026 में, वित्त मंत्रालय ने विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र के लिए कॉर्पोरेट कर ढांचे की व्यापक समीक्षा शुरू की। इसका लक्ष्य अनुपालन को सरल बनाना और उच्च तकनीक वाले उद्योगों के लिए लक्षित प्रोत्साहन प्रदान करना है। प्रभाव: इस नीतिगत बदलाव से महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित होने, घरेलू निर्माताओं के लिए परिचालन लागत कम होने और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत होगी।