भारत-फ्रांस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 'वरुण 2026' संपन्न
2026-07-31पृष्ठभूमि: भारत और फ्रांस के बीच 'वरुण' नौसैनिक अभ्यास श्रृंखला उनकी रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रही है, जो दशकों से समुद्री सहयोग और अंतर-संचालनीयता को बढ़ावा दे रही है। इन अभ्यासों का उद्देश्य जटिल समुद्री वातावरण में आपसी समझ और परिचालन क्षमताओं को बढ़ाना है। वर्तमान संदर्भ: द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'वरुण 2026' का 25वां संस्करण 30 जुलाई 2026 को अरब सागर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इसमें उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्ध अभ्यास, वायु रक्षा अभ्यास और संयुक्त सामरिक युद्धाभ्यास शामिल थे, जिसमें दोनों नौसेनाओं के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों, पनडुब्बियों और समुद्री गश्ती विमानों ने भाग लिया। प्रभाव: इस अभ्यास ने भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत किया, एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इसने सामान्य समुद्री सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने के लिए समन्वय, सूचना साझाकरण और तत्परता में सुधार किया, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान मिला।
डीआरडीओ ने उन्नत स्वदेशी निगरानी ड्रोन 'नेत्र-वी' का सफल परीक्षण किया
2026-07-31पृष्ठभूमि: रक्षा प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से मानवरहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) में आत्मनिर्भरता के लिए भारत का जोर, निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एक रणनीतिक प्राथमिकता रही है। डीआरडीओ अत्याधुनिक स्वदेशी समाधान विकसित करने में सबसे आगे रहा है। वर्तमान संदर्भ: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 29 जुलाई 2026 को 'नेत्र-वी' नामक एक उन्नत स्वदेशी लंबी दूरी के निगरानी ड्रोन के सफल पहले उड़ान परीक्षण की घोषणा की। भारतीय सेना के लिए विकसित इस ड्रोन ने राजस्थान में परीक्षणों के दौरान उन्नत टोही, लक्ष्य अधिग्रहण और वास्तविक समय डेटा प्रसारण क्षमताओं का प्रदर्शन किया। प्रभाव: 'नेत्र-वी' का सफल परीक्षण रक्षा में भारत की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह भारतीय सेना की खुफिया, निगरानी और टोही (आईएसआर) क्षमताओं को काफी बढ़ावा देगा, सीमा प्रबंधन और आतंकवाद विरोधी अभियानों में एक महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करेगा, साथ ही घरेलू रक्षा विनिर्माण को भी बढ़ावा देगा।