आईएनएस तारमुगली को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया
2026-07-12पृष्ठभूमि: भारतीय नौसेना अपनी परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने और मजबूत समुद्री उपस्थिति बनाए रखने के लिए लगातार नए प्लेटफार्मों को शामिल करती है। स्वदेशी जहाज निर्माण इस आधुनिकीकरण अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वर्तमान संदर्भ: 10 जुलाई 2026 को, भारतीय नौसेना ने विशाखापत्तनम में नौसेना बेस पर एक उन्नत वाटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट (WJFAC) आईएनएस तारमुगली को शामिल किया। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित, यह पोत उच्च गति वाले सतह लक्ष्यों को रोकने और तटीय सुरक्षा अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
प्रभाव: आईएनएस तारमुगली के प्रेरण से नौसेना की तटीय रक्षा क्षमताओं में काफी वृद्धि हुई है, जिससे समुद्री खतरों पर प्रतिक्रिया समय तेज हो गया है और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में भारत के समुद्री सुरक्षा ढांचे को मजबूती मिली है।
डीआरडीओ ने उन्नत टॉरपीडो प्रतिवाद प्रणाली का सफलतापूर्वक परीक्षण किया
2026-07-12पृष्ठभूमि: टॉरपीडो हमलों से नौसैनिक संपत्तियों की सुरक्षा समुद्री युद्ध का एक महत्वपूर्ण पहलू है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास में सबसे आगे है।
वर्तमान संदर्भ: 11 जुलाई 2026 को, डीआरडीओ ने ओडिशा के तट पर एक नौसैनिक प्लेटफार्म से एक नई स्वदेशी टॉरपीडो प्रतिवाद प्रणाली (TCS) के सफल परीक्षण की घोषणा की। यह प्रणाली आने वाले टॉरपीडो का पता लगाने, उन्हें बहकाने और निष्क्रिय करने के लिए डिज़ाइन की गई है, जिससे युद्धपोतों की उत्तरजीविता बढ़ती है।
प्रभाव: इस सफल परीक्षण ने नौसैनिक रक्षा प्रणालियों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम चिह्नित किया है। टीसीएस भारतीय नौसेना के युद्धपोतों को समुद्र में आधुनिक टॉरपीडो खतरों के खिलाफ सुरक्षा की एक उन्नत परत प्रदान करेगा, जिससे उनकी युद्ध प्रभावशीलता और परिचालन सुरक्षा बढ़ेगी।