भारत ने उन्नत आकाश-एनजी मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया
2026-07-02पृष्ठभूमि: आकाश-एनजी (नई पीढ़ी) मिसाइल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है, जिसे हवाई खतरों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मौजूदा आकाश मिसाइल प्रणाली का एक उन्नत संस्करण है, जिसे बेहतर प्रदर्शन और क्षमता के लिए तैयार किया गया है।
वर्तमान संदर्भ: भारत की वायु रक्षा क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण वृद्धि करते हुए, डीआरडीओ ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से आकाश-एनजी मिसाइल का एक विकासात्मक उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक किया। मिसाइल ने अपनी उन्नत मार्गदर्शन और नियंत्रण प्रणालियों को मान्य करते हुए, उच्च सटीकता के साथ कई हवाई लक्ष्यों को भेदने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
प्रभाव: इस सफल परीक्षण से मिसाइल प्रौद्योगिकी में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ती है और यह ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों सहित हवाई खतरों की एक विस्तृत श्रृंखला के खिलाफ भारत के वायु रक्षा नेटवर्क को मजबूत करता है। इसे जल्द ही भारतीय वायु सेना और थल सेना में शामिल किए जाने की उम्मीद है।
आईएनएस त्रिकंद ने संयुक्त समुद्री अभ्यास 'सी गार्डियन' में भाग लिया
2026-07-02पृष्ठभूमि: 'सी गार्डियन' एक बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास है जिसका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और सामान्य खतरों से निपटने के लिए भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच अंतरसंचालनीयता और सहयोग को बढ़ाना है।
वर्तमान संदर्भ: भारतीय नौसेना का जहाज (आईएनएस) त्रिकंद, एक अग्रिम पंक्ति का फ्रिगेट, हाल ही में 'सी गार्डियन' अभ्यास में भाग लिया, जो द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का एक प्रमुख घटक है। इस अभ्यास में समुद्री डकैती विरोधी अभ्यास, खोज और बचाव अभियान, और वायु रक्षा अभ्यास सहित जटिल समुद्री परिदृश्यों को शामिल किया गया, जो भागीदार नौसेनाओं के साथ घनिष्ठ समन्वय में आयोजित किए गए।
प्रभाव: 'सी गार्डियन' में आईएनएस त्रिकंद की भागीदारी इंडो-पैसिफिक को स्वतंत्र, खुला और समावेशी बनाए रखने की भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। यह भागीदार देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करता है, भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाता है, और क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री डोमेन जागरूकता में योगदान देता है।
डीआरडीओ ने उन्नत काउंटर-ड्रोन प्रणाली विकसित की
2026-07-02पृष्ठभूमि: निगरानी, तस्करी और संभावित आतंकवादी गतिविधियों के लिए ड्रोन के बढ़ते उपयोग से एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौती उत्पन्न हुई है। भारत इन खतरों का मुकाबला करने के लिए मजबूत समाधान सक्रिय रूप से तलाश रहा है।
वर्तमान संदर्भ: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एक उन्नत, ऑल-इन-वन काउंटर-ड्रोन प्रणाली को सफलतापूर्वक विकसित और प्रदर्शित किया है। यह प्रणाली शत्रुतापूर्ण ड्रोन का प्रभावी ढंग से पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड (ईओ/आईआर) जैमर, और लेजर-आधारित हथियार प्रणाली सहित कई तकनीकों को एकीकृत करती है।
प्रभाव: इस स्वदेशी काउंटर-ड्रोन प्रणाली का विकास मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) से बढ़ते खतरे से निपटने की भारत की क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है। यह संवेदनशील क्षेत्रों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने के लिए एक व्यापक समाधान प्रदान करता है, आयातित प्रणालियों पर निर्भरता कम करता है और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है।