भारत ने अग्नि-V मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया
2026-06-20पृष्ठभूमि: भारत विश्वसनीय निवारण सुनिश्चित करने के लिए अपनी रणनीतिक मिसाइल क्षमताओं को लगातार बढ़ा रहा है। अग्नि श्रृंखला की मिसाइलें इसके परमाणु त्रय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
वर्तमान संदर्भ: एक महत्वपूर्ण विकास में, भारत ने अपनी स्वदेशी रूप से विकसित अग्नि-V मिसाइल का उपयोगकर्ता-विशिष्ट प्रशिक्षण प्रक्षेपण सफलतापूर्वक किया। यह अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) 5,000 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता रखती है, जिससे यह एशिया और यूरोप के कुछ हिस्सों में लक्ष्यों तक पहुंचने में सक्षम है। यह प्रक्षेपण स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC) द्वारा किया गया था।
प्रभाव: सफल परीक्षण भारत की एक प्रमुख मिसाइल शक्ति के रूप में स्थिति की पुष्टि करता है और इसके रणनीतिक निवारण मुद्रा को मजबूत करता है। यह भारत के स्वदेशी मिसाइल विकास कार्यक्रम की परिपक्वता को भी प्रदर्शित करता है, विशेष रूप से उन्नत हथियार प्रणालियों को बनाने में डीआरडीओ की क्षमता को।
भारतीय नौसेना पी-15बी स्टील्थ विध्वंसक जहाजों को शामिल करेगी
2026-06-20पृष्ठभूमि: भारतीय नौसेना समुद्री खतरों का मुकाबला करने और हिंद महासागर क्षेत्र में अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए अपने बेड़े का आधुनिकीकरण कर रही है। आधुनिक युद्धपोतों के लिए पता लगाने से बचने हेतु स्टील्थ तकनीक महत्वपूर्ण है।
वर्तमान संदर्भ: भारतीय नौसेना अपने पी-15बी श्रेणी के गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक जहाजों में से पहले, आईएनएस इम्फाल को शामिल करने के कगार पर है। ये अत्याधुनिक युद्धपोत भारतीय नौसेना के वारशिप डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए हैं और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित किए गए हैं। इनमें उन्नत स्टील्थ क्षमताएं, बढ़ी हुई उत्तरजीविता और एक शक्तिशाली हथियार और सेंसर सूट शामिल हैं।
प्रभाव: पी-15बी विध्वंसक जहाजों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की युद्ध प्रभावशीलता और शक्ति प्रक्षेपण क्षमताओं में काफी वृद्धि होगी। उनकी स्टील्थ विशेषताएं एक सामरिक लाभ प्रदान करेंगी, जबकि उनके उन्नत हथियार उन्हें हवाई-रोधी युद्ध से लेकर पनडुब्बी-रोधी अभियानों तक की एक विस्तृत श्रृंखला को अंजाम देने में सक्षम बनाएंगे।
डीआरडीओ ने उन्नत ड्रोन-रोधी प्रणालियाँ विकसित कीं
2026-06-20पृष्ठभूमि: मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) का प्रसार, जिसमें हथियारबंद ड्रोन भी शामिल हैं, सैन्य प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौती पेश करता है।
वर्तमान संदर्भ: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने शत्रुतापूर्ण ड्रोनों का पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए उन्नत ड्रोन-रोधी प्रणालियाँ विकसित और तैनात की हैं। ये प्रणालियाँ ड्रोन खतरों के खिलाफ एक व्यापक रक्षा प्रदान करने के लिए रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक जैमर के संयोजन का उपयोग करती हैं। वे स्टैंडअलोन और एकीकृत दोनों मोड में काम कर सकती हैं।
प्रभाव: इन उन्नत ड्रोन-रोधी प्रणालियों की तैनाती हवाई खतरों के खिलाफ भारत के सुरक्षा तंत्र को काफी मजबूत करती है। यह जासूसी, तस्करी या आतंकवादी गतिविधियों के लिए ड्रोनों के दुरुपयोग का मुकाबला करने के लिए एक मजबूत समाधान प्रदान करता है, जिससे संवेदनशील स्थानों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा होती है।