भारत-फ्रांस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 'वरुण-26' संपन्न
2026-05-17पृष्ठभूमि: भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग में एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी है। 'वरुण' जैसे संयुक्त नौसैनिक अभ्यास दोनों नौसेनाओं के बीच अंतरसंचालनीयता और समुद्री डोमेन जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। वर्तमान संदर्भ: द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'वरुण-26' का 26वां संस्करण 15 मई, 2026 को अरब सागर में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इसमें दोनों देशों के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों, पनडुब्बियों और समुद्री गश्ती विमानों की भागीदारी के साथ उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्ध अभ्यास, वायु रक्षा अभ्यास और सामरिक युद्धाभ्यास शामिल थे। प्रभाव: यह अभ्यास भारतीय और फ्रांसीसी नौसेनाओं के बीच परिचालन तत्परता और समन्वय को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाता है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। यह सहयोगी सुरक्षा ढाँचों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है और द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करता है।
डीआरडीओ ने उन्नत पारंपरिक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल 'प्रलय-II' का सफल परीक्षण किया
2026-05-17पृष्ठभूमि: भारत लगातार अपनी मिसाइल क्षमताओं को बढ़ाने पर काम कर रहा है, जिसमें रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) स्वदेशी विकास में सबसे आगे है। 'प्रलय' श्रृंखला सटीक हमलों के लिए डिज़ाइन की गई पारंपरिक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइलों की एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती है। वर्तमान संदर्भ: डीआरडीओ ने 16 मई, 2026 को ओडिशा तट से अब्दुल कलाम द्वीप से अपनी पारंपरिक क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल के उन्नत संस्करण 'प्रलय-II' के सफल परीक्षण की घोषणा की। मिसाइल ने बढ़ी हुई रेंज और सटीक मारक क्षमता का प्रदर्शन किया, उच्च सटीकता के साथ सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा किया। प्रभाव: यह सफल परीक्षण भारत की पारंपरिक प्रतिरोधक क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करता है और इसकी रणनीतिक रक्षा स्थिति को सुदृढ़ करता है। यह महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को रेखांकित करता है और सशस्त्र बलों को भविष्य की परिचालन आवश्यकताओं के लिए एक शक्तिशाली, उच्च-सटीक हथियार प्रणाली प्रदान करता है।