आरबीआई ने डिजिटल ऋण पारदर्शिता बढ़ाई
2026-09-07पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) डिजिटल क्षेत्र में शोषणकारी ऋण प्रथाओं पर अंकुश लगाने के लिए काम कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: सितंबर 2026 तक, आरबीआई ने अनिवार्य कर दिया है कि सभी डिजिटल लेंडिंग ऐप्स (DLAs) को उधारकर्ताओं को उनकी समझ में आने वाली भाषा में एक मानकीकृत 'की फैक्ट स्टेटमेंट' (KFS) प्रदान करना होगा। इसमें वार्षिक प्रतिशत दर (APR) और वसूली तंत्र का स्पष्ट खुलासा शामिल है। प्रभाव: यह कदम खुदरा उधारकर्ताओं को छिपे हुए शुल्क और जबरन वसूली के तरीकों से बचाने के लिए है, जिससे भारत में एक अधिक सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल क्रेडिट पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलेगा।
वित्त मंत्रालय ने यूपीआई लेनदेन सीमा की समीक्षा की
2026-09-07पृष्ठभूमि: यूपीआई ने भारत में डिजिटल भुगतान में क्रांति ला दी है, जिसमें लेनदेन की मात्रा रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई है। वर्तमान संदर्भ: 7 सितंबर 2026 को, वित्त मंत्रालय ने उच्च-मूल्य वाले मर्चेंट भुगतान के लिए यूपीआई लेनदेन सीमा की रणनीतिक समीक्षा शुरू की। सरकार सुरक्षा से समझौता किए बिना बड़े बिजनेस-टू-कंज्यूमर (B2C) लेनदेन को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रति-लेनदेन सीमा बढ़ाने की व्यवहार्यता का मूल्यांकन कर रही है। प्रभाव: यदि लागू किया जाता है, तो यह नीतिगत बदलाव डिजिटल वाणिज्य को बढ़ावा देगा, उच्च-मूल्य वाली खरीदारी के लिए नकदी पर निर्भरता कम करेगा और वास्तविक समय डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।