RBI ने उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क को मजबूत किया
2026-08-31पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने निष्पक्ष प्रथाओं को सुनिश्चित करने और उधारकर्ताओं की सुरक्षा के लिए डिजिटल लेंडिंग पर अपने नियामक निरीक्षण को लगातार मजबूत किया है।
वर्तमान संदर्भ: 31 अगस्त, 2026 तक, RBI ने डिजिटल लेंडिंग प्लेटफार्मों के लिए संशोधित दिशानिर्देश पेश किए हैं। इन अपडेट्स में सख्त ग्राहक पहचान (KYC) मानदंड, बढ़ी हुई डेटा गोपनीयता उपाय, और उधारकर्ताओं को सभी शुल्कों और फीस का स्पष्ट प्रकटीकरण अनिवार्य किया गया है। यह ढांचा एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र की आवश्यकता पर भी जोर देता है।
प्रभाव: इस कदम से अनुचित ऋण प्रथाओं पर अंकुश लगने, डिजिटल ऋण प्रस्तावों में पारदर्शिता बढ़ने और डिजिटल क्रेडिट सुविधाओं का लाभ उठाने वाले उपभोक्ताओं के बीच अधिक विश्वास पैदा होने की उम्मीद है। यह फिनटेक कंपनियों को नैतिक आचरण के उच्च मानकों का पालन करने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा।
RBI ने इंटरऑपरेबल कार्ड-टू-कार्ड भुगतानों के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए
2026-08-31पृष्ठभूमि: भारतीय भुगतान परिदृश्य में डिजिटल लेनदेन में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है, जिसमें कार्ड भुगतान एक प्रमुख घटक है। इंटरऑपरेबिलिटी का उद्देश्य उपयोगकर्ता की सुविधा बढ़ाना और भुगतान विकल्पों का विस्तार करना है।
वर्तमान संदर्भ: 29 अगस्त, 2026 को, RBI ने इंटरऑपरेबल कार्ड-टू-कार्ड (C2C) भुगतानों के लिए एक ढांचा जारी किया। यह ग्राहकों को मौजूदा भुगतान अवसंरचना का उपयोग करके, जारीकर्ता बैंक या कार्ड नेटवर्क की परवाह किए बिना, सीधे एक कार्ड से दूसरे कार्ड में धनराशि स्थानांतरित करने की अनुमति देता है। दिशानिर्देश सुरक्षा प्रोटोकॉल और लेनदेन की सीमाओं पर केंद्रित हैं।
प्रभाव: यह पहल मौजूदा तरीकों के लिए एक सहज और कुशल विकल्प प्रदान करके पीयर-टू-पीयर (P2P) और बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) भुगतानों में क्रांति लाने के लिए तैयार है। इससे डिजिटल भुगतान अपनाने को बढ़ावा मिलने और पारंपरिक धन हस्तांतरण तंत्र पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।