आरबीआई ने डिजिटल लेंडिंग पारदर्शिता के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए
2026-07-06पृष्ठभूमि: डिजिटल लेंडिंग ऐप्स के उदय ने डेटा गोपनीयता और अत्यधिक ब्याज दरों के संबंध में चिंताएं बढ़ा दी हैं। वर्तमान संदर्भ: जुलाई 2026 तक, आरबीआई ने अनिवार्य कर दिया है कि सभी डिजिटल ऋणदाताओं को ऋण वितरण से पहले उधारकर्ताओं को मानकीकृत प्रारूप में 'की फैक्ट स्टेटमेंट' (KFS) प्रदान करना होगा। प्रभाव: यह कदम सुनिश्चित करता है कि उधारकर्ता वार्षिक प्रतिशत दर (APR) और वसूली तंत्र के बारे में पूरी तरह से जागरूक रहें, जिससे छिपे हुए शुल्कों का जोखिम कम हो और डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में खुदरा उपभोक्ताओं को शोषणकारी प्रथाओं से बचाया जा सके।
वित्त मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय प्रेषण के लिए यूपीआई सीमा की समीक्षा की
2026-07-06पृष्ठभूमि: यूपीआई ने घरेलू भुगतान में क्रांति ला दी है, और सरकार अब इसकी वैश्विक पहुंच का विस्तार कर रही है। वर्तमान संदर्भ: जुलाई 2026 की शुरुआत में, वित्त मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय प्रेषण के लिए यूपीआई लेनदेन सीमा की रणनीतिक समीक्षा शुरू की ताकि सीमा पार फंड ट्रांसफर को आसान बनाया जा सके। प्रभाव: इन सीमाओं को बढ़ाकर, सरकार का लक्ष्य भारतीय प्रवासियों के लिए प्रेषण की लागत को कम करना और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यूपीआई को अपनाने को प्रोत्साहित करना है, जिससे वैश्विक डिजिटल भुगतान परिदृश्य में भारत की स्थिति मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा मिलेगा।