आरबीआई ने एनबीएफसी के लिए तरलता प्रबंधन को सख्त किया
2026-06-19पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) की निगरानी करता है। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 तक, आरबीआई ने प्रणालीगत जोखिमों को कम करने के लिए बड़ी एनबीएफसी के लिए सख्त तरलता कवरेज अनुपात (LCR) आवश्यकताएं पेश की हैं। यह कदम उच्च गुणवत्ता वाली तरल संपत्तियों की अधिक होल्डिंग अनिवार्य करता है। प्रभाव: इस विनियमन का उद्देश्य अचानक बाजार के झटकों के खिलाफ शैडो बैंकिंग क्षेत्र के लचीलेपन को बढ़ाना है। यह सुनिश्चित करता है कि एनबीएफसी वित्तीय तनाव के दौरान अल्पकालिक दायित्वों को पूरा कर सकें, जिससे जमाकर्ताओं की सुरक्षा हो सके।
डिजिटल रुपया (ई-रुपया) पायलट का विस्तार
2026-06-19पृष्ठभूमि: आरबीआई ने भौतिक नकदी के पूरक के रूप में 2022 के अंत में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) पायलट लॉन्च किया था। वर्तमान संदर्भ: जून 2026 में, आरबीआई ने व्यापक व्यापारी स्वीकृति के लिए ई-रुपये को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के साथ एकीकृत करने की घोषणा की। यह चरण निर्बाध इंटरऑपरेबिलिटी पर केंद्रित है, जिससे उपयोगकर्ता मौजूदा UPI QR कोड पर ई-रुपये के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं। प्रभाव: यह विस्तार खुदरा लेनदेन में डिजिटल मुद्रा को अपनाने को बढ़ावा देता है। यह नकदी प्रबंधन की लागत को कम करता है और भौतिक मुद्रा के लिए एक सुरक्षित, प्रोग्राम योग्य विकल्प प्रदान करता है।