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आरबीआई नीति, डिजिटल भुगतान और हरित वित्त अपडेट

आरबीआई की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर अपरिवर्तित
2026-06-18
पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा करता है। इन समीक्षाओं में रेपो दर जैसी प्रमुख ब्याज दरों पर निर्णय शामिल होते हैं। वर्तमान संदर्भ: 18 जून, 2026 को अपनी नवीनतम समीक्षा में, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने वैश्विक अनिश्चितताओं और विकास के साथ मुद्रास्फीति नियंत्रण को संतुलित करने की आवश्यकता का हवाला देते हुए रेपो दर को 6.5% पर बनाए रखने का फैसला किया। एमपीसी ने वित्त वर्ष 27 की तीसरी तिमाही के लिए अपनी मुद्रास्फीति के अनुमान को भी थोड़ा ऊपर संशोधित किया। प्रभाव: यह निर्णय एक सतर्क दृष्टिकोण का संकेत देता है, जो उधारकर्ताओं और निवेशकों के लिए स्थिरता प्रदान करता है। बैंक संभवतः वर्तमान उधार दरों को बनाए रखेंगे, जिससे ऋण वृद्धि प्रभावित होगी। दीर्घकालिक वित्तीय क्षेत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण, उभरती आर्थिक रिकवरी का समर्थन करते हुए मुद्रास्फीति की उम्मीदों को स्थिर रखने पर ध्यान केंद्रित है।
एनपीसीआई ने ग्रामीण डिजिटल वित्तीय समावेशन के लिए 'भारतपे' लॉन्च किया
2026-06-18
पृष्ठभूमि: भारत ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल वित्तीय समावेशन को आक्रामक रूप से बढ़ावा दे रहा है, ताकि अधिक लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में लाया जा सके। यूपीआई जैसे मौजूदा प्लेटफॉर्म को जबरदस्त सफलता मिली है। वर्तमान संदर्भ: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सहयोग से, विशेष रूप से ग्रामीण भारत के लिए डिज़ाइन किया गया एक नया एकीकृत डिजिटल भुगतान मंच 'भारतपे' लॉन्च किया है। यह यूपीआई, एईपीएस और माइक्रो-एटीएम सेवाओं को एकीकृत करता है, जो सरलीकृत ऑफ़लाइन लेनदेन क्षमताएं और बहुभाषी समर्थन प्रदान करता है। प्रभाव: 'भारतपे' से दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल लेनदेन को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलने, नकदी पर निर्भरता कम होने और वित्तीय साक्षरता बढ़ने की उम्मीद है। यह छोटे व्यापारियों और किसानों को सशक्त करेगा, आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा और वित्तीय समावेशन को गहरा करेगा, जिससे समग्र डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा।
आरबीआई ने हरित वित्त के लिए नया नियामक ढांचा जारी किया
2026-06-18
पृष्ठभूमि: विश्व स्तर पर, केंद्रीय बैंक जलवायु-संबंधी वित्तीय जोखिमों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और स्थायी वित्त को बढ़ावा दे रहे हैं। भारत के वित्तीय क्षेत्र को हरित परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा देने के लिए मजबूत ढांचे की आवश्यकता है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 'हरित वित्त' के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा जारी किया है, जिसमें बैंकों और एनबीएफसी को जलवायु-संबंधी वित्तीय जोखिमों का आकलन और रिपोर्टिंग करने के लिए विशिष्ट नीतियां विकसित करने का निर्देश दिया गया है। यह पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ परियोजनाओं के लिए ऋण देने हेतु प्रोत्साहन भी पेश करता है और हरित पोर्टफोलियो के लिए प्रकटीकरण आवश्यकताओं को रेखांकित करता है। प्रभाव: यह कदम हरित पहलों की ओर पूंजी के प्रवाह को गति देगा, भारत के जलवायु लक्ष्यों और कम कार्बन अर्थव्यवस्था में संक्रमण का समर्थन करेगा। यह जलवायु जोखिमों के खिलाफ वित्तीय प्रणाली के लचीलेपन को भी बढ़ाएगा, बैंकिंग क्षेत्र में जिम्मेदार ऋण और निवेश प्रथाओं को प्रोत्साहित करेगा।
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