RBI ने वैश्विक चुनौतियों के बीच रेपो दर अपरिवर्तित रखी
2026-06-13पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) प्रमुख ब्याज दरों के समायोजन के माध्यम से मुद्रास्फीति का प्रबंधन करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा करता है। ये निर्णय वित्तीय बाज़ार की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
वर्तमान संदर्भ: जून 2026 की अपनी समीक्षा में, RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह लगातार सातवीं बार ठहराव है, जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप सुनिश्चित करने की आवश्यकता के बीच एक सतर्क रुख को दर्शाता है।
प्रभाव: यह स्थिरता बैंकों के लिए पूर्वानुमेयता प्रदान करती है, जिससे उनकी उधार और जमा दरें प्रभावित होती हैं। इसका उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए ऋण वृद्धि का समर्थन करना है, जो उपभोक्ता ऋण लागत और समग्र आर्थिक गतिविधि को प्रभावित करता है।
RBI द्वारा डिजिटल ऋण प्लेटफार्मों के लिए नए दिशानिर्देश जारी
2026-06-13पृष्ठभूमि: भारत में डिजिटल ऋण ऐप्स के तेजी से प्रसार ने उपभोक्ताओं को अनुचित प्रथाओं से बचाने और डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत नियामक निरीक्षण की आवश्यकता पैदा की। पिछले दिशानिर्देशों ने कुछ चिंताओं को संबोधित किया था, लेकिन एक व्यापक ढाँचा अभी भी विकसित हो रहा था।
वर्तमान संदर्भ: RBI ने 10 जून, 2026 को डिजिटल ऋण के लिए अद्यतन व्यापक दिशानिर्देश जारी किए, जो सभी विनियमित संस्थाओं और उनके ऋण सेवा प्रदाताओं (LSPs) पर लागू होते हैं। नया ढाँचा पारदर्शिता, निष्पक्ष प्रथाओं और सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल पर जोर देता है, जिसमें डेटा एक्सेस के लिए स्पष्ट सहमति शामिल है।
प्रभाव: इन कड़े नियमों से उपभोक्ता संरक्षण में उल्लेखनीय वृद्धि होने, अनैतिक वसूली प्रथाओं पर अंकुश लगने और अधिक सुरक्षित तथा विश्वसनीय डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह वैध खिलाड़ियों के लिए संचालन को सुव्यवस्थित करेगा और जनता का विश्वास बढ़ाएगा।
सरकार ने विकास के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी डाली
2026-06-13पृष्ठभूमि: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) भारत के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें अक्सर अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने, नियामक पूंजी मानदंडों को पूरा करने और अपनी ऋण देने की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार से पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है, खासकर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए।
वर्तमान संदर्भ: केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 11 जून, 2026 को पांच प्रमुख PSBs में ₹25,000 करोड़ के पूंजी निवेश की घोषणा की। इस रणनीतिक कदम का उद्देश्य उनके वित्तीय स्वास्थ्य को मजबूत करना, परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार करना और उन्हें MSMEs तथा बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को अधिक ऋण देने में सक्षम बनाना है, जिससे आर्थिक सुधार का समर्थन होगा।
प्रभाव: यह पूंजी वृद्धि PSBs के पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CAR) में उल्लेखनीय सुधार करेगी, जिससे वे ऋण बढ़ा सकेंगे और राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों में अधिक प्रभावी ढंग से योगदान कर सकेंगे। यह बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का भी संकेत देता है।