आरबीआई ने डिजिटल ऋण पारदर्शिता बढ़ाई
2026-05-25पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल ऋण ऐप्स के तेजी से विकास की निगरानी कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 तक, आरबीआई ने अनिवार्य कर दिया है कि सभी डिजिटल ऋण संस्थाओं को ऋण वितरण से पहले उधारकर्ताओं को मानकीकृत प्रारूप में 'मुख्य तथ्य विवरण' (KFS) प्रदान करना होगा। इसमें वार्षिक प्रतिशत दर (APR) और वसूली शुल्क का स्पष्ट खुलासा शामिल है। प्रभाव: इस कदम का उद्देश्य शोषणकारी ऋण प्रथाओं पर अंकुश लगाना, खुदरा उधारकर्ताओं के लिए छिपी हुई लागत को कम करना और भारत के डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वास को बढ़ावा देना है।
शहरी सहकारी बैंकों के लिए पीसीए ढांचे की रणनीतिक समीक्षा
2026-05-25पृष्ठभूमि: त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (PCA) ढांचा आरबीआई द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक पर्यवेक्षी उपकरण है, जो वित्तीय तनाव के संकेत दिखाने वाले बैंकों में हस्तक्षेप करता है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 में, वित्त मंत्रालय और आरबीआई ने विशेष रूप से शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए पीसीए ढांचे की रणनीतिक समीक्षा शुरू की। यह समीक्षा सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए पूंजी पर्याप्तता, परिसंपत्ति गुणवत्ता और लाभप्रदता अनुपात पर केंद्रित है। प्रभाव: यह पहल कमजोर बैंकों की शीघ्र पहचान करने, प्रणालीगत जोखिमों को रोकने और सहकारी क्षेत्र में छोटे ग्राहकों की जमा राशि की सुरक्षा करने में मदद करेगी।