मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच आरबीआई ने रेपो दर अपरिवर्तित रखी
2026-05-13पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और आर्थिक विकास का समर्थन करने के लिए द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा करता है। ये समीक्षाएँ रेपो दर जैसी प्रमुख ब्याज दरों को निर्धारित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान संदर्भ: 10 मई, 2026 को अपनी नवीनतम समीक्षा में, मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया। यह निर्णय वैश्विक मुद्रास्फीति के लगातार दबावों और घरेलू विकास के सतर्क दृष्टिकोण के बीच आया है। आरबीआई ने धीरे-धीरे समायोजन वापस लेने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रभाव: यथास्थिति बनाए रखने का उद्देश्य आर्थिक सुधार का समर्थन करते हुए मुद्रास्फीति नियंत्रण को संतुलित करना है। यह उधारकर्ताओं और ऋणदाताओं के लिए स्थिरता प्रदान करता है, हालांकि भविष्य में दर में कटौती मुद्रास्फीति के प्रक्षेपवक्र पर निर्भर करेगी। व्यवसायों को मौजूदा उधार लागत का सामना करना पड़ेगा, जबकि जमाकर्ताओं को स्थिर रिटर्न मिल सकता है।
भारतीय स्टेट बैंक ने एमएसएमई के लिए 'एसएमई साथी' डिजिटल ऋण मंच का अनावरण किया
2026-05-13पृष्ठभूमि: भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए समय पर और पर्याप्त ऋण तक पहुंच एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है, जो अक्सर उनके विकास में बाधा डालती है। पारंपरिक ऋण प्रक्रियाएं समय लेने वाली होती हैं और इनमें व्यापक दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता होती है। वर्तमान संदर्भ: 12 मई, 2026 को, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने 'एसएमई साथी' नामक एक उन्नत एआई-संचालित डिजिटल ऋण मंच लॉन्च किया। इस मंच का लक्ष्य पात्र एमएसएमई को ₹50 लाख तक के त्वरित, संपार्श्विक-मुक्त ऋण प्रदान करना है, जो तेजी से क्रेडिट मूल्यांकन और 72 घंटों के भीतर संवितरण के लिए डेटा एनालिटिक्स का लाभ उठाएगा। प्रभाव: 'एसएमई साथी' से एमएसएमई के लिए वित्तीय समावेशन को काफी बढ़ावा मिलने और अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर उनकी निर्भरता कम होने की उम्मीद है। यह ऋण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगा, दक्षता बढ़ाएगा और छोटे व्यवसायों के विकास का समर्थन करेगा, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा।
सेबी ने हरित बॉन्ड बाजार में नए प्रकटीकरण मानदंडों के साथ पारदर्शिता बढ़ाई
2026-05-13पृष्ठभूमि: हरित बॉन्ड पर्यावरण के अनुकूल परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले ऋण साधन हैं। सतत वित्त पर बढ़ते वैश्विक फोकस के साथ, भारतीय हरित बॉन्ड बाजार में महत्वपूर्ण विस्तार देखा गया है, जो घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: 11 मई, 2026 को, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने हरित बॉन्ड जारीकर्ताओं के लिए संशोधित और सख्त प्रकटीकरण मानदंडों की घोषणा की। नए दिशानिर्देशों में आय के उपयोग, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन और तीसरे पक्ष के सत्यापन पर अधिक विस्तृत रिपोर्टिंग अनिवार्य है, जिसका उद्देश्य 'ग्रीनवॉशिंग' को रोकना है। प्रभाव: पारदर्शिता के ये बढ़े हुए उपाय भारत के हरित बॉन्ड बाजार में निवेशकों का अधिक विश्वास पैदा करेंगे, यह सुनिश्चित करते हुए कि धन वास्तव में स्थायी परियोजनाओं की ओर निर्देशित हो। यह जलवायु-अनुकूल पहलों के लिए अधिक पूंजी आकर्षित करेगा, भारत को सतत वित्त में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ संरेखित करेगा, और अर्थव्यवस्था भर में जिम्मेदार निवेश को बढ़ावा देगा।