आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर 6.50% पर बरकरार रखी
2026-05-12पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) आर्थिक स्थिति का आकलन करने और मुख्य नीतिगत दरों, विशेष रूप से रेपो दर पर निर्णय लेने के लिए द्विमासिक बैठक करती है, ताकि विकास का समर्थन करते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखी जा सके। यह वित्तीय बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। वर्तमान संदर्भ: 10 मई, 2026 को अपनी नवीनतम समीक्षा में, MPC ने लगातार मुद्रास्फीति दबावों और मजबूत घरेलू विकास का हवाला देते हुए रेपो दर को 6.50% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। मुद्रास्फीति को लक्ष्य के अनुरूप सुनिश्चित करने के लिए रुख 'समायोजन की वापसी' बना रहा। प्रभाव: यह निर्णय मौद्रिक नीति में निरंतरता का संकेत देता है, जो बैंकों की उधार और जमा दरों को प्रभावित करता है। इसका उद्देश्य मुद्रास्फीति की उम्मीदों को स्थिर करना, वित्तीय प्रणाली को स्थिरता प्रदान करना और अर्थव्यवस्था में भविष्य के निवेश और उपभोग पैटर्न को निर्देशित करना है।
आरबीआई ने खुदरा डिजिटल रुपया (ई-रुपया) पायलट कार्यक्रम का विस्तार किया
2026-05-12पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) थोक और खुदरा दोनों खंडों के लिए अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC), जिसे ई-रुपया के नाम से जाना जाता है, का क्रमिक रूप से परीक्षण कर रहा है। प्रारंभिक खुदरा पायलट ने इसकी परिचालन व्यवहार्यता का परीक्षण करने के लिए विशिष्ट शहरों और बैंकों पर ध्यान केंद्रित किया था। वर्तमान संदर्भ: 11 मई, 2026 को, RBI ने खुदरा ई-रुपया पायलट कार्यक्रम के महत्वपूर्ण विस्तार की घोषणा की, जिसमें पांच अतिरिक्त सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों को शामिल किया गया और इसकी पहुंच दस नए शहरों तक बढ़ाई गई। यह चरण ऑफ़लाइन कार्यक्षमता और प्रोग्रामेबल भुगतानों का भी पता लगाएगा। प्रभाव: इस विस्तार का उद्देश्य डिजिटल मुद्रा को अपनाने में तेजी लाना, भुगतान प्रणाली की दक्षता बढ़ाना, भौतिक नकदी पर निर्भरता कम करना और वित्तीय सेवाओं में नवाचार को बढ़ावा देना है। यह भारत को एक मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे के करीब ले जाता है।
आरबीआई ने हरित वित्त के लिए नया नियामक ढांचा पेश किया
2026-05-12पृष्ठभूमि: विश्व स्तर पर, वित्तीय संस्थानों के लिए अपने परिचालन में पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन (ESG) कारकों को एकीकृत करने की बढ़ती आवश्यकता है। भारत भी सतत विकास और जलवायु लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध है, जिसके लिए एक मजबूत हरित वित्त पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है। वर्तमान संदर्भ: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 9 मई, 2026 को हरित वित्त के लिए एक व्यापक नियामक ढांचा जारी किया। ये दिशानिर्देश बैंकों और NBFCs को हरित वित्तपोषण नीतियां विकसित करने, जलवायु-संबंधी वित्तीय जोखिमों का आकलन करने और अपने सतत ऋण पोर्टफोलियो पर रिपोर्ट करने का आदेश देते हैं। प्रभाव: यह ढांचा पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ परियोजनाओं की ओर ऋण प्रवाहित करेगा, जिम्मेदार ऋण प्रथाओं को प्रोत्साहित करेगा और जलवायु जोखिमों के खिलाफ वित्तीय क्षेत्र के लचीलेपन को बढ़ाएगा। यह भारत की वित्तीय प्रणाली को वैश्विक स्थिरता मानकों और राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों के साथ संरेखित करता है।