आरबीआई ने डिजिटल ऋण पारदर्शिता बढ़ाई
2026-05-06पृष्ठभूमि: आरबीआई डिजिटल ऋण ऐप्स के तेजी से विकास और उनसे जुड़ी शोषणकारी प्रथाओं पर नजर रख रहा है। वर्तमान संदर्भ: मई 2026 तक, आरबीआई ने अनिवार्य किया है कि सभी विनियमित संस्थाओं को ऋण वितरण से पहले उधारकर्ताओं को मानकीकृत प्रारूप में 'की फैक्ट स्टेटमेंट' (KFS) प्रदान करना होगा। इसमें वार्षिक प्रतिशत दर (APR) और वसूली तंत्र शामिल हैं। प्रभाव: इस कदम का उद्देश्य छिपे हुए शुल्कों पर अंकुश लगाना और यह सुनिश्चित करना है कि उधारकर्ता ऋण की कुल लागत के प्रति पूरी तरह जागरूक रहें, जिससे डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वास बढ़ेगा।
सेबी ने एआईएफ के लिए प्रकटीकरण मानदंड सख्त किए
2026-05-06पृष्ठभूमि: वैकल्पिक निवेश कोष (AIFs) में पूंजी का प्रवाह काफी बढ़ा है, जिसके कारण निवेशकों की सुरक्षा के लिए सख्त निगरानी की आवश्यकता है। वर्तमान संदर्भ: सेबी ने एआईएफ के लिए नए प्रकटीकरण मानदंड पेश किए हैं, जिसमें पोर्टफोलियो एकाग्रता और मूल्यांकन पद्धतियों पर विस्तृत रिपोर्टिंग अनिवार्य है। ये मानदंड मई 2026 से प्रभावी हैं ताकि निजी इक्विटी और हेज फंड संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। प्रभाव: बेहतर प्रकटीकरण से निवेशकों को अंतर्निहित परिसंपत्तियों और जोखिमों की स्पष्ट जानकारी मिलेगी। इस नियामक सख्ती से बाजार की अखंडता में सुधार और गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र में प्रणालीगत जोखिम कम होने की उम्मीद है।