RBI ने राष्ट्रव्यापी ऑफलाइन डिजिटल रुपया (CBDC) सुविधा शुरू की
2026-05-04पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को आधुनिक बनाने के लिए 2022 में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) पायलट शुरू किया था। वर्तमान संदर्भ: 4 मई, 2026 को, RBI ने आधिकारिक तौर पर देश भर में 'ऑफलाइन डिजिटल रुपया' सुविधा शुरू की। यह उपयोगकर्ताओं को नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) तकनीक का उपयोग करके सक्रिय इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना CBDC का उपयोग करके लेनदेन करने की अनुमति देता है। प्रभाव: इस कदम से ग्रामीण भारत में डिजिटल विभाजन को पाटने, शैडो जोन में निर्बाध वित्तीय लेनदेन सुनिश्चित करने और इंटरनेट पर निर्भर UPI लेनदेन का विकल्प प्रदान करके डिजिटल भुगतान बुनियादी ढांचे के लचीलेपन को बढ़ाने की उम्मीद है।
SEBI ने शीर्ष 500 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए T+0 सेटलमेंट चक्र अनिवार्य किया
2026-05-04पृष्ठभूमि: बाजार दक्षता में सुधार और जोखिमों को कम करने के लिए भारत ने 2023 में T+2 से T+1 निपटान (settlement) में बदलाव किया था। वर्तमान संदर्भ: 4 मई, 2026 से प्रभावी, सेबी (SEBI) ने भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर शीर्ष 500 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए 'T+0 सेटलमेंट साइकिल' अनिवार्य कर दी है। यह सुनिश्चित करता है कि शेयरों और फंडों का निपटान उसी दिन हो जाए जिस दिन व्यापार किया गया है। प्रभाव: यह सुधार बाजार की तरलता में काफी वृद्धि करेगा, काउंटरपार्टी जोखिमों को कम करेगा और निवेशकों को उनकी पूंजी तक तत्काल पहुंच प्रदान करेगा। यह भारत को पूंजी बाजार प्रौद्योगिकी में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करता है, जिससे अधिक खुदरा और संस्थागत भागीदारी आकर्षित होगी।
RBI ने बड़े NBFC को एकीकृत ऋण इंटरफेस (ULI) के साथ एकीकृत करने का निर्देश दिया
2026-05-04पृष्ठभूमि: एकीकृत ऋण इंटरफेस (ULI) की परिकल्पना RBI द्वारा विभिन्न डेटा प्रदाताओं से सूचना प्रवाह को डिजिटल बनाकर घर्षण रहित ऋण वितरण की सुविधा के लिए की गई थी। वर्तमान संदर्भ: 4 मई, 2026 तक, RBI ने ₹5,000 करोड़ से अधिक की संपत्ति वाली सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को ULI प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत करने का निर्देश दिया है। प्रभाव: यह एकीकरण ऋणदाताओं को सत्यापित वित्तीय और भूमि रिकॉर्ड डेटा तक त्वरित पहुंच प्रदान करके MSMEs और छोटे उधारकर्ताओं के लिए ऋण मूल्यांकन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगा। इससे ऋण प्रसंस्करण समय हफ्तों से घटकर मिनटों में आने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय संस्थानों के लिए परिचालन लागत में काफी कमी आएगी।