RBI ने मुद्रास्फीति की चिंताओं के बीच रेपो दर 6.50% पर बरकरार रखी
2026-05-02पृष्ठभूमि: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने, आर्थिक विकास का समर्थन करने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए नियमित रूप से अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है। इन समीक्षाओं में अक्सर रेपो दर जैसी प्रमुख ब्याज दरों पर निर्णय शामिल होते हैं। वर्तमान संदर्भ: 2 मई, 2026 को संपन्न अपनी नवीनतम मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में, RBI ने लगातार मुद्रास्फीति दबावों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का हवाला देते हुए रेपो दर को 6.50% पर बनाए रखने का फैसला किया। नीतिगत रुख 'समायोजन की वापसी' बना रहा। प्रभाव: यह निर्णय मुद्रास्फीति की उम्मीदों को स्थिर करने के RBI के सतर्क दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह अल्पावधि में बैंकों और उपभोक्ताओं के लिए उधार लेने की लागत को स्थिर रखेगा, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में ऋण वृद्धि और निवेश निर्णयों पर असर पड़ सकता है।
RBI ने डिजिटल ऋण देने वाले प्लेटफॉर्मों के लिए सख्त नियम पेश किए
2026-05-02पृष्ठभूमि: भारत में डिजिटल ऋण देने वाले प्लेटफॉर्मों के तेजी से विकास ने शिकारी प्रथाओं, डेटा गोपनीयता और पारदर्शिता के संबंध में चिंताएं बढ़ाई हैं। RBI उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए इस क्षेत्र की सक्रिय रूप से निगरानी कर रहा है। वर्तमान संदर्भ: RBI ने 1 मई, 2026 को डिजिटल ऋण देने के लिए नए दिशानिर्देशों का एक व्यापक सेट जारी किया, जिसमें सख्त KYC मानदंडों, ब्याज दरों और शुल्कों का पारदर्शी प्रकटीकरण और ऋण रद्द करने के लिए कूलिंग-ऑफ अवधि अनिवार्य की गई। इसने एक मजबूत शिकायत निवारण तंत्र की आवश्यकता पर भी जोर दिया। प्रभाव: इन विनियमों का उद्देश्य डिजिटल ऋण पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक अनुशासन और जवाबदेही लाना है। हालांकि यह शुरू में कुछ आक्रामक खिलाड़ियों को धीमा कर सकता है, लेकिन यह अंततः उधारकर्ताओं के लिए एक सुरक्षित और अधिक भरोसेमंद वातावरण को बढ़ावा देगा, जिससे फिनटेक क्षेत्र में स्थायी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार और RBI ने नए ढांचे के साथ हरित वित्त को बढ़ावा दिया
2026-05-02पृष्ठभूमि: भारत अपने जलवायु लक्ष्यों और हरित अर्थव्यवस्था में परिवर्तन के लिए प्रतिबद्ध है। हरित वित्त, विशेष रूप से हरित बांडों के माध्यम से, पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने हेतु महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: वित्त मंत्रालय ने, RBI के सहयोग से, 30 अप्रैल, 2026 को सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं द्वारा 'सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड' जारी करने और वाणिज्यिक बैंकों द्वारा 'ग्रीन डिपॉजिट' योजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक नया ढांचा घोषित किया। इस पहल का उद्देश्य हरित वित्त प्रवाह को सुव्यवस्थित करना है। प्रभाव: यह रणनीतिक पहल नवीकरणीय ऊर्जा, टिकाऊ बुनियादी ढांचे और अन्य पर्यावरण-अनुकूल परियोजनाओं के लिए धन की उपलब्धता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देगी। यह ESG (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) अनुरूप निवेशों में रुचि रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों को भी आकर्षित करेगा, जिससे वैश्विक हरित वित्त बाजारों में भारत की स्थिति मजबूत होगी।