RBI ने डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क 2.0 का अनावरण किया
2026-04-20पृष्ठभूमि: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2022 में उधारकर्ताओं को अनधिकृत ऐप्स और शोषणकारी प्रथाओं से बचाने के लिए डिजिटल लेंडिंग को विनियमित किया था। वर्तमान संदर्भ: 20 अप्रैल 2026 को, RBI ने 'डिजिटल लेंडिंग फ्रेमवर्क 2.0' पेश किया। यह अद्यतन नीति विशेष रूप से सीमा पार फिनटेक संचालन को लक्षित करती है और AI-संचालित क्रेडिट अंडरराइटिंग और स्कोरिंग मॉडल में पूर्ण पारदर्शिता अनिवार्य करती है। प्रभाव: यह कदम फिनटेक क्षेत्र में प्रणालीगत जोखिमों को काफी कम करेगा, बेहतर डेटा संप्रभुता सुनिश्चित करेगा और उपभोक्ताओं को एल्गोरिथम पूर्वाग्रहों से बचाएगा, जिससे भविष्य के विकास के लिए भारत में एक अधिक सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलेगा।
SEBI ने T+0 निपटान चक्र के पूर्ण कार्यान्वयन को अनिवार्य किया
2026-04-20पृष्ठभूमि: भारत ने 2023 में T+2 से T+1 निपटान (settlement) प्रणाली को अपनाया था, जिससे व्यापार दक्षता में वैश्विक स्तर पर बढ़त मिली। 2024 में T+0 का बीटा संस्करण लॉन्च किया गया था। वर्तमान संदर्भ: 20 अप्रैल 2026 तक, सेबी (SEBI) ने भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों में सभी इक्विटी लेनदेन के लिए T+0 (उसी दिन) निपटान चक्र को पूर्ण रूप से लागू करना अनिवार्य कर दिया है। प्रभाव: यह परिवर्तन भारत को सभी शेयरों के लिए तत्काल निपटान की पेशकश करने वाली पहली बड़ी अर्थव्यवस्था बनाता है। यह खुदरा निवेशकों के लिए तरलता में भारी सुधार करता है, निपटान जोखिमों को कम करता है और घरेलू एवं वैश्विक संस्थागत निवेशकों के लिए भारतीय पूंजी बाजार के आकर्षण और दक्षता को बढ़ाता है।
नाबार्ड ने ₹5,000 करोड़ का ग्रीन एग्री-फिनटेक फंड लॉन्च किया
2026-04-20पृष्ठभूमि: नाबार्ड (NABARD) ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ऋण प्रवाह प्रदान करने और कृषि नवाचार का समर्थन करने में एक आधारशिला रहा है। वर्तमान संदर्भ: 19 अप्रैल 2026 को, नाबार्ड ने ₹5,000 करोड़ के 'ग्रीन एग्री-फिनटेक फंड' की घोषणा की। यह फंड उन स्टार्टअप्स का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो छोटे किसानों को जलवायु-अनुकूल वित्तीय उपकरण और सटीक कृषि तकनीक प्रदान करते हैं। प्रभाव: यह पहल किफायती ऋण प्रदान करके टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने में तेजी लाएगी। यह एग्री-टेक क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करता है, जिससे किसानों को जलवायु जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी और नेट जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता में योगदान मिलेगा।