'काशी जरदोजी' कढ़ाई को नया भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग
2026-09-05पृष्ठभूमि: भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग उन उत्पादों को दिए जाते हैं जिनकी भौगोलिक उत्पत्ति के कारण अद्वितीय गुणवत्ता होती है। यह पारंपरिक शिल्पों की सुरक्षा और उनके बाजार मूल्य को बढ़ाने में मदद करता है।
वर्तमान संदर्भ: वाराणसी से उत्पन्न एक पारंपरिक शिल्प, 'काशी जरदोजी' कढ़ाई को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। यह जटिल धात्विक कढ़ाई, जिसमें अक्सर सोने और चांदी के धागों का उपयोग किया जाता है, भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रभाव: जीआई टैग काशी जरदोजी को कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा, नाम के अनधिकृत उपयोग को रोकेगा और इसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करेगा। इससे जुड़े कारीगरों की आर्थिक संभावनाओं में वृद्धि होने और इस अनूठे शिल्प को विश्व स्तर पर बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र ने 'रानी की वाव' संरक्षण पर प्रगति की समीक्षा की
2026-09-05पृष्ठभूमि: गुजरात के पाटन में स्थित 'रानी की वाव' (रानी का बावड़ी) अपनी जटिल वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। ऐसे अमूल्य स्मारकों को संरक्षित करने के लिए संरक्षण प्रयास महत्वपूर्ण हैं।
वर्तमान संदर्भ: यूनेस्को विश्व धरोहर केंद्र ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सहयोग से हाल ही में रानी की वाव में चल रहे संरक्षण और परिरक्षण गतिविधियों की समीक्षा की। समीक्षा में संरचनात्मक अखंडता, सौंदर्य बहाली और आगंतुक प्रबंधन रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
प्रभाव: यह समीक्षा सुनिश्चित करती है कि संरक्षण प्रथाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों, जिससे बावड़ी भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे। यह स्थल के विरासत मूल्य को बनाए रखने में आगे सुधार और संभावित चुनौतियों के क्षेत्रों की पहचान करने में भी मदद करता है।