नए जीआई टैग आवेदनों से पारंपरिक शिल्पों को बढ़ावा
2026-09-01पृष्ठभूमि: भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग बौद्धिक संपदा अधिकार का एक रूप है जो किसी वस्तु को एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति के रूप में पहचानता है, और जिसमें उस उत्पत्ति के कारण गुण या प्रतिष्ठा होती है। भारत में अद्वितीय शिल्पों की एक समृद्ध परंपरा है। वर्तमान संदर्भ: 1 सितंबर 2026 तक के पिछले कुछ दिनों में, भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री को ओडिशा के जटिल हथकरघा बुनाई और राजस्थान की अनूठी मिट्टी के बर्तनों सहित विभिन्न राज्यों के पारंपरिक शिल्पों के लिए जीआई टैग के कई नए आवेदन प्राप्त हुए हैं। प्रभाव: इन आवेदनों का उद्देश्य इन शिल्पों की प्रामाणिकता और विशिष्टता की रक्षा करना, नकल को रोकना और मान्यता प्राप्त ब्रांड मूल्य प्रदान करके कारीगरों की आर्थिक संभावनाओं को बढ़ाना है।
राष्ट्रीय संग्रहालय संग्रह के लिए डिजिटल पुरालेख पहल
2026-09-01पृष्ठभूमि: नई दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय में भारतीय इतिहास और संस्कृति के सहस्राब्दियों तक फैले कलाकृतियों का एक विशाल संग्रह है। इन कलाकृतियों को डिजिटल रूप से संरक्षित करना अनुसंधान और सार्वजनिक पहुंच के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान संदर्भ: 1 सितंबर 2026 तक, राष्ट्रीय संग्रहालय ने अपनी प्रमुख प्रदर्शनियों में से 70% से अधिक को सफलतापूर्वक डिजिटाइज़ करते हुए, अपनी डिजिटल पुरालेख परियोजना में तेजी लाई है। संस्कृति मंत्रालय द्वारा समर्थित इस पहल में उन्नत इमेजिंग तकनीकों और मेटाडेटा टैगिंग का उपयोग किया गया है। प्रभाव: यह डिजिटल भंडार न केवल संभावित भौतिक क्षरण से अमूल्य सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करेगा, बल्कि इन कलाकृतियों को ऑनलाइन प्लेटफार्मों के माध्यम से वैश्विक दर्शकों के लिए सुलभ भी बनाएगा, जिससे भारत के समृद्ध अतीत की गहरी समझ और सराहना को बढ़ावा मिलेगा।