‘काशी वीव्स’ सिल्क साड़ियों के लिए नया जीआई टैग
2026-08-06पृष्ठभूमि: भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग उन उत्पादों को दिए जाते हैं जिनमें उनके भौगोलिक मूल के कारण अद्वितीय गुण होते हैं। यह पारंपरिक शिल्पों की सुरक्षा और उनके बाजार मूल्य को बढ़ाने में मदद करता है।
वर्तमान संदर्भ: 5 अगस्त 2026 को, भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री ने वाराणसी के पारंपरिक हथकरघा उत्पाद ‘काशी वीव्स’ सिल्क साड़ियों को जीआई टैग प्रदान किया। यह मान्यता स्थानीय कारीगरों और कपड़ा मंत्रालय के प्रयासों का परिणाम है।
प्रभाव: जीआई टैग इन साड़ियों की उत्पत्ति को प्रमाणित करने, नकल को रोकने और मांग बढ़ाकर तथा उचित मूल्य सुनिश्चित करके बुनकरों को सशक्त बनाने में मदद करेगा, जिससे इस महत्वपूर्ण सांस्कृतिक शिल्प का संरक्षण होगा।
भारतीय शास्त्रीय संगीत के लिए डिजिटल पुरालेख पहल
2026-08-06पृष्ठभूमि: भारत में शास्त्रीय संगीत की एक समृद्ध परंपरा है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है। इन अमूल्य संगीत विरासतों का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों और अकादमिक अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण है।
वर्तमान संदर्भ: 6 अगस्त 2026 तक, संगीत नाटक अकादमी ने संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से एक व्यापक डिजिटल पुरालेख परियोजना शुरू की है। इस पहल का उद्देश्य विभिन्न भारतीय शास्त्रीय संगीत घरानों के दुर्लभ प्रदर्शनों, रचनाओं और मौखिक परंपराओं को रिकॉर्ड करना, डिजिटाइज़ करना और सूचीबद्ध करना है।
प्रभाव: यह परियोजना भारत की संगीत विरासत का एक विशाल, सुलभ डिजिटल भंडार बनाएगी, इसे क्षय और हानि से बचाएगी। यह भारतीय शास्त्रीय संगीत में रुचि रखने वाले छात्रों, शोधकर्ताओं, संगीतकारों और आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में काम करेगा।