कश्मीरी पश्मीना को प्रामाणिकता के लिए जीआई टैग मिला
2026-07-21पृष्ठभूमि: भारत के भौगोलिक संकेत (जीआई) रजिस्ट्री उन उत्पादों को जीआई टैग प्रदान करती है जिनमें उनके मूल स्थान के कारण अद्वितीय गुण होते हैं। यह टैग उत्पाद को नकल से बचाता है और उसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करता है।
वर्तमान संदर्भ: हाल ही में, कश्मीरी पश्मीना को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग से सम्मानित किया गया है। यह मान्यता कश्मीर के हथकरघा बुनकरों के लिए महत्वपूर्ण है, यह सुनिश्चित करते हुए कि इस नाम के तहत केवल पारंपरिक तरीकों से क्षेत्र में बने असली पश्मीना उत्पादों को ही बेचा जा सकता है।
प्रभाव: जीआई टैग बाजार में नकली पश्मीना उत्पादों की बाढ़ की समस्या से निपटने में मदद करेगा, जिससे स्थानीय कारीगरों की आजीविका सुरक्षित होगी और कश्मीरी पश्मीना की अनूठी सांस्कृतिक विरासत को विश्व स्तर पर बढ़ावा मिलेगा। इससे निर्यात को बढ़ावा मिलने और प्रामाणिक कश्मीरी पश्मीना के ब्रांड मूल्य में वृद्धि होने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय संग्रहालय ने प्राचीन पांडुलिपि संग्रह का डिजिटलीकरण किया
2026-07-21पृष्ठभूमि: सांस्कृतिक कलाकृतियों का डिजिटलीकरण उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने और उन्हें व्यापक दर्शकों के लिए सुलभ बनाने की एक प्रमुख पहल है। इस प्रक्रिया में नाजुक और दुर्लभ वस्तुओं की उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल प्रतियां बनाना शामिल है।
वर्तमान संदर्भ: राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के सहयोग से राष्ट्रीय संग्रहालय ने अपने प्राचीन पांडुलिपि संग्रह के एक महत्वपूर्ण हिस्से का डिजिटलीकरण पूरा कर लिया है। इसमें सदियों पुराने दर्शन, चिकित्सा और खगोल विज्ञान जैसे विभिन्न विषयों पर दुर्लभ ग्रंथ शामिल हैं।
प्रभाव: यह परियोजना इन अमूल्य ऐतिहासिक दस्तावेजों के क्षरण से बचाते हुए उनके दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करती है। यह शोधकर्ताओं, विद्वानों और आम जनता के लिए इन पांडुलिपियों को ऑनलाइन एक्सेस करने और उनका अध्ययन करने के नए रास्ते भी खोलता है, जिससे भारत के बौद्धिक इतिहास की गहरी समझ और सराहना को बढ़ावा मिलता है।