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कला और संस्कृति अपडेट: जीआई टैग, विरासत स्थल और त्यौहार

पारंपरिक शिल्पों के लिए नए जीआई टैग आवेदन
2026-07-13
पृष्ठभूमि: भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग बौद्धिक संपदा अधिकार का एक रूप है जो किसी वस्तु को विशिष्ट गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेषताओं के रूप में पहचानता है जो अनिवार्य रूप से उसके मूल स्थान के कारण होती है। भारत में अद्वितीय हस्तशिल्प की एक समृद्ध परंपरा है। वर्तमान संदर्भ: 13 जुलाई 2026 तक के पिछले कुछ दिनों में, भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री में कई पारंपरिक भारतीय शिल्पों के लिए भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग के नए आवेदन जमा किए गए हैं। इन आवेदनों में हिमाचल प्रदेश की जटिल लकड़ी की नक्काशी, ओडिशा की हाथ से बुनी रेशम की साड़ियाँ और राजस्थान की अनूठी मिट्टी के बर्तन शामिल हैं। प्रभाव: इन शिल्पों को जीआई टैग प्रदान करने से अनधिकृत उपयोग के खिलाफ कानूनी सुरक्षा मिलेगी, उनके बाजार मूल्य को बढ़ावा मिलेगा, और कारीगरों के पारंपरिक कौशल और विरासत को मान्यता देकर उन्हें सशक्त बनाया जाएगा। यह पहल 'मेक इन इंडिया' अभियान का समर्थन करती है और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देती है।
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल नामांकन प्रक्रिया जारी
2026-07-13
पृष्ठभूमि: भारत में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में 42 स्थल शामिल हैं, जो इसकी विविध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को दर्शाते हैं। नामांकन प्रक्रिया कठोर है और इसमें व्यापक दस्तावेज़ीकरण और मूल्यांकन शामिल है। वर्तमान संदर्भ: 13 जुलाई 2026 तक, संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सहयोग से, संभावित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के लिए नामांकन तैयार करने और जमा करने में सक्रिय रूप से लगा हुआ है। इस वर्ष का ध्यान अमूर्त सांस्कृतिक विरासत और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों पर है, जिसमें 'मराठा सैन्य वास्तुकला' और 'होयसल के पवित्र समूह' जैसे स्थलों के लिए प्रारंभिक डोजियर भेजे जा रहे हैं। प्रभाव: यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में सफल नामांकन से पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलता है, संरक्षण प्रयासों को प्रोत्साहन मिलता है, और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ती है। यह विरासत संरक्षण में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भी सुगम बनाता है।
शास्त्रीय नृत्य का राष्ट्रीय उत्सव समारोह
2026-07-13
पृष्ठभूमि: भारत अपने विविध शास्त्रीय नृत्य रूपों के लिए प्रसिद्ध है, जिनमें से प्रत्येक का एक अनूठा इतिहास और प्रदर्शन सूची है। ये रूप राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न अंग हैं और विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों द्वारा इन्हें बढ़ावा दिया जाता है। वर्तमान संदर्भ: 13 जुलाई 2026 तक, संस्कृति मंत्रालय के तहत संगीत नाटक अकादमी ने नई दिल्ली में 'राष्ट्रीय नृत्य उत्सव' का आयोजन किया है। 10 जुलाई 2026 को शुरू हुए इस उत्सव में भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी और कथकली सहित विभिन्न शास्त्रीय नृत्य परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रशंसित कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। इस आयोजन का उद्देश्य इन कला रूपों की जीवंतता और विकास को प्रदर्शित करना है। प्रभाव: यह उत्सव कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक मंच प्रदान करता है, जनता के बीच शास्त्रीय कलाओं के प्रति सराहना को बढ़ावा देता है, और भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में योगदान देता है। यह देश भर के कलाकारों और पारखी लोगों को एक साथ लाकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान के रूप में भी कार्य करता है।
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