संस्कृति मंत्रालय ने 'मेरा गाँव मेरी धरोहर' परियोजना का विस्तार किया
2026-07-12पृष्ठभूमि: संस्कृति मंत्रालय द्वारा शुरू की गई "मेरा गाँव मेरी धरोहर" परियोजना का उद्देश्य भारत के सभी गाँवों का डिजिटल दस्तावेजीकरण और मानचित्रण करना है, उनकी अनूठी सांस्कृतिक विरासत को उजागर करना है। यह पहल एक व्यापक राष्ट्रीय सांस्कृतिक सूची बनाने का प्रयास करती है।
वर्तमान संदर्भ: 12 जुलाई, 2026 को, संस्कृति मंत्रालय ने परियोजना के तीसरे चरण के विस्तार की घोषणा की, जिसमें राजस्थान और मध्य प्रदेश के 10,000 गाँवों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह चरण स्थानीय परंपराओं, कला रूपों और ऐतिहासिक स्थलों की पहचान और संरक्षण के लिए उन्नत डिजिटल संग्रह तकनीकों और सामुदायिक भागीदारी पर जोर देता है।
प्रभाव: यह विस्तार भारत की विविध ग्रामीण विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देगा, इसे विश्व स्तर पर सुलभ बनाएगा। यह स्थानीय समुदायों को उनके सांस्कृतिक योगदान को मान्यता देकर और संभावित रूप से ग्रामीण पर्यटन और शिल्प उद्योगों को बढ़ावा देकर, पहचान और गौरव की गहरी भावना को बढ़ावा देगा।
गुजरात की 'कच्छी रोगन कला' को मिला नया जीआई टैग
2026-07-12पृष्ठभूमि: भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग पारंपरिक शिल्पों और कृषि उत्पादों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं, उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करते हैं और दुरुपयोग को रोकते हैं। रोगन कला, कच्छ, गुजरात से उत्पन्न एक अनूठी चित्रकला शैली है, जो कपड़े पर जटिल पैटर्न बनाने के लिए अरंडी के तेल-आधारित रंगों का उपयोग करती है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है।
वर्तमान संदर्भ: 12 जुलाई, 2026 को, भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री ने आधिकारिक तौर पर 'कच्छी रोगन कला' को जीआई टैग प्रदान किया। यह मान्यता इसकी विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति और इसके निर्माण में शामिल पारंपरिक कौशल को स्वीकार करती है। आवेदन निरोना गाँव के कारीगरों के एक समूह द्वारा दायर किया गया था।
प्रभाव: जीआई टैग 'कच्छी रोगन कला' को कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा, इसके बाजार मूल्य को बढ़ाएगा और नकल को रोकेगा। यह कारीगर समुदाय को सशक्त करेगा, उनके अद्वितीय शिल्प के लिए उचित रिटर्न सुनिश्चित करेगा और इसकी स्थिरता को बढ़ावा देगा। इस कदम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने और गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर अधिक ध्यान आकर्षित होने की उम्मीद है।