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कला और संस्कृति समाचार: जीआई टैग, संग्रहालय और विरासत संरक्षण

'कांचीपुरम सिल्क साड़ी' को मिला भारत का जीआई टैग
2026-06-30
पृष्ठभूमि: भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग उन उत्पादों पर इस्तेमाल किया जाने वाला एक चिह्न है जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है और जिनमें उस उत्पत्ति के कारण गुण या प्रतिष्ठा होती है। यह भारत के भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री द्वारा प्रदान किया जाता है। वर्तमान संदर्भ: तमिलनाडु की प्रसिद्ध 'कांचीपुरम सिल्क साड़ी' को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। यह मान्यता इसके उत्पादन में उपयोग की जाने वाली रेशम की अनूठी बुनाई तकनीकों, पारंपरिक शिल्प कौशल और विशिष्ट गुणवत्ता का प्रमाण है। प्रभाव: जीआई टैग कांचीपुरम रेशम साड़ियों की प्रामाणिकता की रक्षा करने, बाजार में नकली उत्पादों के प्रवेश को रोकने और इसके वैश्विक बाजार मूल्य और उपभोक्ता विश्वास को बढ़ाकर बुनकरों और क्षेत्र की आर्थिक संभावनाओं को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
राष्ट्रीय संग्रहालय ने प्राचीन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया
2026-06-30
पृष्ठभूमि: नई दिल्ली में राष्ट्रीय संग्रहालय दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों सहित कलाकृतियों का एक विशाल संग्रह रखता है, जो भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन नाजुक दस्तावेजों का संरक्षण एक महत्वपूर्ण चुनौती है। वर्तमान संदर्भ: राष्ट्रीय संग्रहालय ने अपनी प्राचीन पांडुलिपियों के संग्रह को डिजिटल बनाने की एक व्यापक परियोजना शुरू की है। इस पहल में इन अमूल्य ग्रंथों की उच्च-रिज़ॉल्यूशन स्कैनिंग और सूचीकरण शामिल है, जिससे वे शोधकर्ताओं और जनता के लिए डिजिटल रूप से सुलभ हो सकें। प्रभाव: डिजिटलीकरण नाजुक पांडुलिपियों के दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करता है, भौतिक टूट-फूट को रोकता है, और ऐतिहासिक ज्ञान तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाता है। यह व्यापक अनुसंधान, शैक्षिक आउटरीच और भारत की समृद्ध साहित्यिक विरासत को विश्व स्तर पर बढ़ावा देने की सुविधा प्रदान करता है।
'रानी की वाव' को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा
2026-06-30
पृष्ठभूमि: यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल ऐसे स्थान होते हैं जैसे जंगल, पहाड़, झीलें, रेगिस्तान, स्मारक, भवन, शहर या परिसर जिन्हें उनके सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक या प्राकृतिक महत्व के लिए मान्यता दी जाती है। 'रानी की वाव' गुजरात में एक प्राचीन बावड़ी है। वर्तमान संदर्भ: गुजरात के पाटन में स्थित एक शानदार बावड़ी, 'रानी की वाव' को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में अंकित किया गया है। यह मान्यता 11वीं शताब्दी की जल प्रबंधन प्रणाली के रूप में इसकी असाधारण वास्तुशिल्प प्रतिभा और इसके ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करती है। प्रभाव: विश्व धरोहर का दर्जा स्थल पर पर्यटन को बढ़ावा देने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय समुदाय को आर्थिक लाभ होगा। यह संरक्षण के प्रयासों को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर देता है और भारत की समृद्ध वास्तुशिल्प और इंजीनियरिंग विरासत के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाता है।
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