बिहार में पुरातात्विक सर्वेक्षण में प्राचीन बौद्ध मठ का पता चला
2026-06-13पृष्ठभूमि: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) भारत के ऐतिहासिक अतीत को उजागर करने के लिए नियमित रूप से खुदाई करता है। ये निष्कर्ष अक्सर प्राचीन सभ्यताओं और धार्मिक प्रथाओं पर प्रकाश डालते हैं।
वर्तमान संदर्भ: हालिया रिपोर्टों से पता चलता है कि बिहार क्षेत्र में एक खुदाई के दौरान एएसआई की एक टीम ने एक प्राचीन बौद्ध मठ के अवशेषों की खोज की है। प्रारंभिक निष्कर्षों से पता चलता है कि मठ गुप्त काल का है, जिसमें स्थल पर जटिल नक्काशी और कलाकृतियाँ मिली हैं।
प्रभाव: यह खोज प्राचीन भारत में बौद्ध धर्म के प्रसार और गुप्त काल के दौरान प्रचलित वास्तुशिल्प शैलियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। इससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने और क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व पर आगे शोध होने की उम्मीद है।
काशी की 'गंगा आरती' और 'ठठेरा शिल्प' यूनेस्को अमूर्त विरासत सूची के लिए नामांकित
2026-06-13पृष्ठभूमि: यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक परंपराओं की जीवित अभिव्यक्तियों को मान्यता देती है। भारत की कई ऐसी परंपराएं पहले से ही सूचीबद्ध हैं।
वर्तमान संदर्भ: संस्कृति मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी से दो महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रथाओं को नामांकित किया है: पवित्र गंगा आरती समारोह और पारंपरिक ठठेरा शिल्प (धातु के बर्तन बनाने की कला)। इन नामांकनों का उद्देश्य उनके सांस्कृतिक मूल्य के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करना और उनके संरक्षण को सुनिश्चित करना है।
प्रभाव: यूनेस्को सूची में शामिल होने से इन प्रथाओं पर वैश्विक ध्यान आकर्षित होगा, उनकी निरंतरता को प्रोत्साहित मिलेगा और उनके अभ्यासकर्ताओं के लिए समर्थन प्रदान होगा। यह भारत की विविध अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है।